इधर सीबीआई ने नेशनल हेराल्ड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर शिकंजा कसा, उधर उनकी राजनीति की राह में मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। पार्टी और पार्टी के बाहर राजनीतिक विरोधियों के साथ शह और मात का खेल खेल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर सीबीआई सहित अन्य जांच एजेंसियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। सूबे की मनोहर सरकार ने सबसे पहले पिछले साल मानेसर जमीन घोटाले में भूपेंद्र हुड्डा को फंसाने की रणनीति तैयार की।
इस साल नेशनल हेराल्ड मामला भी सीबीआई के सुपुर्द कर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस आलाकमान के साथ राबर्ट वाड्रा और भूपेंद्र हुड्डा को घेरने के लिए वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच के लिए गठित एसएन ढींगरा आयोग की रिपोर्ट भी आ चुकी है। सियासी दांवपेच में उलझी यह रिपोर्ट अभी उजागर नहीं हुई है, लेकिन 2019 के चुनाव से पहले यह रिपोर्ट जनता के सामने आ सकती है। पंचकूला में हुडा प्लाट आवंटन मामले की जांच पहले से ही चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील में जांच आयोग ने भी कई अनियमितताओं का खुलासा किया है। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को नौ घंटे तक चली सीबीआई पूछताछ में हुड्डा से सीबीआई अधिकारियों ने लगातार घुमा फिरा कर सवाल किए। इस दौरान उपरोक्त मामलों से संबंधित रिकार्ड भी हुड्डा के सामने रखा गया और सवाल हुए। हालांकि, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीबीआई की पूछताछ को साधारण बताया है। उन्होंने कहा है कि वे पूरा सहयोग कर रहे हैं।