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प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा कोर्ट में हुए पेश, मोतीलाल वोरा को राहत

Sat, 01 Jun 2019 01:38 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : एएनआई
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मानेसर जमीन घोटाले और एजेएल प्लॉट आवंटन के दोनों मामलों की सुनवाई शुक्रवार को पंचकूला सीबीआई कोर्ट में हुई। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पेशी पर कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने मानेसर जमीन घोटाले के मामले में अगली सुनवाई 6 जून को निर्धारित की। जबकि एजेएल मामले की सुनवाई के लिए भी 12 जुलाई की तिथि निर्धारित की। 

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इससे पहले मानेसर जमीन घोटाले में एक आरोपी जसवंत ने कोर्ट में डिस्चार्ज करने को लेकर याचिका दायर की। याचिका पर 6 जून को सुनवाई होगी। वहीं, एजेएल मामले में 12 जुलाई को होने वाली सुनवाई में जिरह हो सकती है लेकिन पहले दस्तावेज पूरे करने होंगे। मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो कोर्ट में पेश हुए। लेकिन आरोपी मोती लाल वोरा ने मेडिकल के आधार पर पेशी से छूट हासिल की।

इस सुनवाई से पहले बीते बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय ने पंचकूला सेक्टर-6 स्थित एजेएल के करोड़ों रुपये के प्लॉट की अटैचमेंट प्रक्रिया पूरी की थी। ईडी इससे पहले गुड़गांव और पंचकूला में करीब 64 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच कर चुकी है। 

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24 साल बाद पुराने रेट पर प्लॉट किया था अलॉट 

पंचकूला के सेक्टर-6 में 3,360 वर्गमीटर के प्लॉट नंबर सी-17 को 24 अगस्त 1982 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने अलॉट कराया था। कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू कर काम दो साल में पूरा करना था लेकिन 10 साल में भी ऐसा नहीं किया गया। 30 अक्टूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हुडा ने अलॉटमेंट निरस्त कर प्लॉट को रिज्यूम किया।

फिर 26 जुलाई 1995 को हुडा ने ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी। फिर 14 मार्च 1998 को कंपनी की तरफ से आबिद हु्सैन ने हुडा के चेयरमैन को प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की अपील की। चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने 14 मई 2005 को अधिकारियों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा। 

इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। फिर 28 अगस्त 2005 को एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉटमेंट की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू कर एक साल में काम पूरा करने को कहा गया था।
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