मानेसर लैंड डील केस की वीरवार को विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई। मामले के आरोपी हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 34 आरोपी कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई में बचाव पक्ष के वकील अभिषेक सिंह राणा ने कहा कि अभी तक सीबीआई की ओर से हमें सभी डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा कि बचाव पक्ष को सभी डाक्यूमेंट सीबीआई की ओर से मुहैया कराए जाएं।
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि सीबीआई पूरे डाक्यूमेंट देने के साथ डाक्यूमेंट के बारे में बचाव पक्ष को जानकारी दे। सीबीआई की अदालत ने अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को मुकर्रर की है। पिछली सुनवाई खत्म होने के बाद बचाव पक्ष के वकील ने कहा था कि सीबीआई ने चार्जशीट के डॉक्यूमेंट्स उन्हें पूरे नहीं दिए और जो डाक्यूमेंट्स दिए गए हैं। उसमें कई डाक्यूमेंट्स अभी तक उन्हें नहीं मिले हैं।
मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित 34 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई थी। आरोपियों में पर्व सीएम हुड्डा के अलावा एमएल तायल, छतर सिंह, एसएस ढिल्लों, सहित कई बिल्डरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है। सीबीआई ने हुड्डा सहित 34 आरोपियों के खिलाफ 17 सितंबर 2015 को मामला दर्ज किया था। मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर-2016 में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था।
क्या है मानेसर लैंड डील केस
बता दें कि मानेसर के तीन गांवों में किसानों को अधिग्रहण के नाम पर डराकर उनसे सस्ती दरों पर जमीन खरीदकर बाद में बिल्डरों के साथ साठगांठ कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया था। आरोपियों ने मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के किसानों और जमीन मालिकों को आईएमटी के नाम पर जमीन अधिग्रहण का भय दिखाकर कुछ नेताओं के साथ मिलकर जमीन की खरीद फरोख्त में धोखाधड़ी की। अधिग्रहण का भय दिखाकर किसानों से जमीन लेने के लिए आरोपियों ने कुछ दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर भी किए थे। आरोपियों पर हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डर्स को कम दाम पर बेचने का आरोप हैं।