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जिस आतंकी को मान चुके थे मरा हुआ, 27 साल बाद वो देश में ही मिला, जानिए कौन?

Tue, 20 Mar 2018 11:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कपूरथला(पंजाब)
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आतंकी गिरफ्तार
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जिस आतंकवादी को पुलिस मरा हुआ मान चुकी थी, वो 27 साल बाद देश में ही मिला। खालिस्तान कमांडो फोर्स और बब्बर खालसा से उसके संबंध रहे हैं। दरअसल, हत्या, टाडा और असलहा एक्ट में वांछित भिंडरांवाला टाइगर फोर्स (बीटीएफ) के आतंकवादी रणजीत सिंह उर्फ राणा को पुलिस ने 27 साल बाद जालंधर के शाहकोट से धर दबोचा। पुलिस के अनुसार उसके खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) और बब्बर खालसा के आतंकियों से भी संबंध रहे हैं।
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एसएसपी संदीप कुमार शर्मा ने दावा किया कि आरोपी ने आतंकवाद के काले दौर में दोआबा में पांच वारदात की बात कबूली है। हालांकि दो केस में वह बरी हो चुका है। एसएसपी ने सोमवार को स्थानीय पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि होशियारपुर के माहिलपुर स्थित गांव जगतपुर जट्ठां के रहने वाले 55 वर्षीय आतंकी रणजीत निवासी पर थाना सदर फगवाड़ा में 13 मई 1991 में हत्या, टाडा और असलहा एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में वह वांटेड था।

आरोप है कि रणजीत सिंह ने गांव मानावाली में जगदीश सिंह उर्फ दीशा के साथ मिलकर सुरिंदर सिंह को गोलियों से भून डाला था। इसके बाद 1993 में वह गिरफ्तारी के डर से गांव शालापुर थाना नुगड़, जिला सहारनपुर (यूपी) भाग गया। वहां पर ग्रंथी बनकर रहने लगा। एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में राणा ने कबूला है कि 1985 में उसके सतनाम सिंह सत्ता पुत्र हरनाम सिंह निवासी पलटावा थाना बंगा, गुरलाल सिंह और रणजीत सिंह जैसे नामी आतंकवादियों से संबंध रहे हैं।
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अब तक पुलिस समझती रही मृत

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एसएसपी के अनुसार जब भी इस मामले को लेकर थाना सदर फगवाड़ा की पुलिस आरोपी के गांव में पूछताछ के लिए जाती थी तो यही कहा जाता था कि आतंकवाद के काले दौर में उसकी मौत हो गई है। पुलिस के मुताबिक कट्टरपंथी संस्थाओं ने बताया कि उसका कोई पारिवारिक सदस्य नहीं है, इसलिए उन्होंने उसका भोग भी डाल दिया। इस कारण पुलिस अब तक उसे मृत ही मान रही थी। लेकिन इसके शाहकोट में होने की खुफिया सूचना मिली तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं आतंकी रणजीत सिंह ने मीडिया के सामने दावा किया कि उसके भाई और पिता जिंदा हैं।

शाहकोट में ग्रंथी बनकर रह रहा था आतंकी
भिंडरावाला टाइगर फोर्स का आतंकी रणजीत सिंह उर्फ राणा पिछले एक साल से गांव कोहाड़कलां थाना शाहकोट जिला जालंधर के गुरुद्वारा साहिब में ग्रंथी के तौर पर रह रहा था। एसएसपी संदीप शर्मा के अनुसार आरोपी ने अपने साथी रणजीत सिंह व सतनाम सिंह के साथ मिलकर 1988 में सुरिंदर सिंह घुद्दा निवासी पद्दीसुरा सिंह थाना माहिलपुर जिला होशियारपुर की हत्या की। 1990 में साथी तोची और मीते के साथ मिलकर गांव मुबारकपुर जिला रोपड़ में ठेके के कारिंदों को गोलियों से भून डाला।

1997 में दो हैंड ग्रेनेड के साथ थाना शाहकोट जिला जालंधर पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस दौरान विस्फोटक एक्ट के तहत इस पर केस दर्ज हुआ था, जिसमें दो साल की सजा भुगतने के बाद यूपी भाग गया। इसके बाद 21 मार्च 2013 को गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के चलते असलाह एक्स और गैर कानूनी गतिविधियों के तहत थाना माहिलपुर में केस दर्ज हुआ। इस मामले में वह जमानत पर गया।
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मीडिया से बोला- श्री दरबार साहिब पर हमले ने झकझोरा

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मीडिया के सामने आतंकी रणजीत सिंह राणा ने कहा कि 1984 में श्री दरबार साहिब पर हमले की घटना ने उसे इस राह की तरफ भटकाया। उस समय वह महज 21 साल का था और किसी ने उसे सही-गलत के बारे में नहीं बताया। उसने कहा कि उसे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है। किसी को भी इस राह पर नहीं चलना चाहिए।

हत्या सहित दो केस में हो चुका है बरी
आरोपी राणा 1988 में थाना गढ़शंकर में दर्ज हुए केस और 1990 में थाना सोहाना जिला रोपड़ में हत्या, टाडा और असलहा एक्ट में बरी हो चुका हैं। जबकि फगवाड़ा के गांव मानावाली और थाना माहिलपुर में दर्ज केस अदालत में विचाराधीन है। थाना माहिलपुर में गैर-कानूनी गतिवधियों में शामिल होने के मामले में दर्ज केस में वह अभी जमानत पर था।
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