सतलुज यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर सभी सियासी व अन्य संगठन मिल कर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, लेकिन सेमिनार में कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। वहीं सियासी दलों ने भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) की ओर से आयोजित सेमिनार में इस पर सहमति जताई। यूनियन ने अगली रणनीति तय करने को सात अगस्त को बैठक बुला ली है।
प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल की अगुवाई में हुए सेमिनार में सत्ताधारी कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि पंजाब और हरियाणा से बातचीत कर एसवाईएल बनवाने के बारे में तीन सितंबर को रिपोर्ट दे। इसे लेकर मचे सियासी कोहराम के बीच हुए सेमिनार में माहिरों ने सभी पक्ष रखे।
सीनियर वकील राजविंदर बैंस ने 1955 से अब तक जारी आदेशों और समझौतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने तथ्यों के आधार पर कहा कि किसी भी राज्य का पंजाब की नदियों के पानी में कोई हक नहीं है। पीएयू के डॉ. एसएस कक्कल और डॉ. अजमेर सिंह बराड़ ने कहा कि हमारे 109 ब्लॉकों में पानी खत्म होने के कगार पर है। दो ब्लॉकों में तो खत्म ही हो गया है।
अर्थशास्त्री डॉ. रणजीत सिंह घुम्मन ने कहा कि नहरी सिंचाई के अधीन पंजाब का रकबा लगातार घट रहा है।