भगवान की प्रकृति हमें शुभ ग्रहण करने का संकेत करती है। हरे भरे पेड़, रंग बिरंगे फूल, पर्वत पर ढकी सफे द बर्फ की चादर, आसमान में सजी सतरंगी इंद्र धनुष! यदि ये रंग न होते तो रंगहीन सृष्टि कैसी दिखाई देती? निष्प्राण! नीरस।
इस प्रकार प्रकृति प्रत्येक मनुष्य को यही प्रेरणा देती है कि हर दिशा से शुभ विचारों को ग्रहण करो और उनसे मिलने वाली प्रेरणाओं के रंग भरकर अपना जीवन सुंदर व सरस बनाओ।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सेक्टर-पांच के मेला ग्राउंड में श्रीमद्भागवत महापुराण नवाह ज्ञान यज्ञ के आयोजन के दौरान साध्वी वैष्णवी भारती ने गोवर्धन लीला के रहस्य को लोगों के समक्ष खूबसूरती से पेश किया। सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
नंद बाबा और गांव वालों की ओर से इंद्र यज्ञ की तैयारियां चलती देखकर भगवान श्री कृष्ण उनसे प्रशभन पूछते हैं उनको गोवर्धन पूजन व धरती का पूजन करने के लिए उत्साहित करते हैं।
प्रभु का भाव यह था कि जो धरती वनस्पति जल के द्वारा हमारा पोषण कर रही है उसकी वंदन और पूजन करना चाहिए। धरती का प्रतीक मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की गई। छप्पन व्यंजनों का भोग भगवान को दिया गया।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के सांसद पवन कुमार बंसल और उनकी पत्नी मधु बंसल के साथ उपस्थित हुए।