सांसद भगवंत मान ने कहा कि एक बार वह श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणातुंगा से
मिले। श्रीलंका में खिलाड़ियों को ग्राउंड लेवल से सिखाकर नेशनल टीम में
एंट्री मिलती है जिस वजह से वह खिलाड़ी किसी कोचिंग की वजह से अपने खेलने
का नेचर नहीं बदलता, इसलिए उनकी टीम में अलग अलग एक्शन वाले बॉलर हैं।
शनिवार दोपहर को यह बात सांसद भगवंत मान ने प्रेस क्लब में कही। वह यहां बच्चों के लिए शुरू हुई वर्कशाप के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। एक जून से 15 जून तक चलने वाली इस वर्कशॉप में बच्चों को डांस के टिप्स दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आजतक बच्चों को लेकर मां बाप की एक ही मानसिकता रही है कि
बड़े होकर डॉक्टर बनो, इंजीनियर बनो, लेकिन कोई मां बाप यह नहीं कहता कि
बेटे बड़े होकर गुरदास मान बनो।
मान ने कहा कि आजकल बच्चों पर प्रेशर बहुत बढ़ गया है। माता पिता अपने बच्चे को ज्यादा से ज्यादा अंक लाने के लिए प्रेरित करते हैं। अपना एक वाकिया सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब उनकी लड़की चंडीगढ़ के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही थी तो उन्हें मीटिंग में बुलाया गया, जिसमें कई माता पिता भी अपने बच्चों के साथ पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि इस दौरान एक मां अध्यापक से बात कर रही थी कि उनका बच्चा पढ़ाई नहीं करता वह उसे रात भर पढ़ने के लिए बैठाती हैं, लेकिन कभी वह पेंसिल टूटने का बहाना लगाता है या सर दर्द होने का।
उन्होंने बताया कि दरअसल वह बच्चा पढ़ाई से बोर हो गया था, थोपी गई पढ़ाई उसे पसंद नहीं आ रही थी, इसलिए बच्चे को उसके नेचर के हिसाब से ही पढ़ाई करवानी चाहिए।