पंजाब के बहुचर्चित बहिबल कलां गोलीकांड में पुलिस ने जो कहानी बनाई थी, वह झूठी निकली। एसआईटी ने पोल खोलते हुए पूरे सच का खुलासा कर दिया है। एसआईटी ने बहिबल गोलीकांड में मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की पायलट जिप्सी पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा किया है। इस प्रकरण के पीछे मामले में नामजद फाजिल्का के तत्कालीन एसपी बिक्रमजीत सिंह की भूमिका सामने आई है।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि एसपी बिक्रमजीत सिंह 14 अक्तूबर 2015 को घटना के बाद एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की पायलट जिप्सी को लेकर फरीदकोट में कोटकपूरा रोड निवासी एक नामी वकील के घर पहुंचे। यहां उन्होंने कार डीलर पंकज कुमार के मैनेजर संजीव कुमार से डीलर के निजी गनमैन चरनजीत सिंह की 12 बोर की गन मंगवाई और उससे जिप्सी पर दो फायर किए।
एसआईटी ने शुक्रवार को वकील के भाई सुहेल सिंह बराड़, कार डीलर के मैनेजर संजीव कुमार व उसके निजी गनमैन चरनजीत सिंह के बयान धारा 164 के तहत जेएमआईसी चेतन शर्मा की अदालत में दर्ज करवा दिए हैं।
यह दावा किया था पुलिस ने
जानकारी के अनुसार, बहिबल गोलीकांड मामले में मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने अपना बचाव करने के लिए एक झूठी कहानी गढ़ी थी। दावा किया गया कि बहिबल में जब पुलिस पार्टी द्वारा धरना दे रहे लोगों को समझाया जा रहा था तो मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की पायलट जिप्सी पर 12 बोर की गन से फायरिंग हुई थी। इसके बाद पुलिस को अपने बचाव में गोलियां चलानी पड़ीं। फायरिंग से जिप्सी पर 18 निशान पड़ गए थे। एसआईटी ने जांच में इस कहानी को मनगढ़ंत पाया।
ड्राइवर ने कहा, नहीं हुई फायरिंग
जांच के दौरान एसएसपी की उक्त जिप्सी के ड्राइवर गुरनाम सिंह ने बयान दर्ज करवाए थे कि उस दिन जिप्सी पर घटनास्थल पर कोई फायरिंग ही नहीं हुई थी। एसआईटी उक्त ड्राइवर के बयान को पहले ही धारा 164 के तहत अदालत में दर्ज करवा चुकी है। इस तरह चार दिन से जिप्सी पर फायरिंग मामले में एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा व एसपी बिक्रमजीत सिंह के करीबियों से पूछताछ कर रही एसआईटी ने शुक्रवार को इस मामले को सुलझा लिया।
बेअंत सिंह को किसके हथियार से लगी गोली
एसआईटी की पड़ताल में सामने आया है कि गोलीकांड में घायल हुए बेअंत सिंह को एके-47 राइफल से गोली लगी थी। बेअंत सिंह ने बयान दिया है कि उसे इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने गोली मारी थी, जबकि इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह का कहना है कि उसके पास तो विभाग की प्वाइंट 9 एमएम की पिस्टल थी जिससे कोई गोली नहीं चली। अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि आखिरकार बेअंत सिंह को गोली किसके हथियार से लगी, जबकि पुलिस अधिकारियों ने अपना सारा असलहा व कारतूस जमा करवा दिए थे।
हाईकोर्ट से टिप्पणी से पुलिस अधिकारियों को राहत
बहिबल गोलीकांड मामले में नामजद तत्कालीन थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार को अंतरिम जमानत देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी से पुलिस अधिकारियों को कुछ राहत दी है। जस्टिस रमिन्द्रा जैन की अदालत ने एमआई अमरजीत सिंह कुलार की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा कि बहिबल गोलीकांड मामले के लिए सिर्फ पुलिस को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता।