यूटी के संपदा विभाग ने चाहे पिछले माह रिहायशी और कामर्शियल प्रापर्टी की नीलामी की योजना को टाल दिया, लेकिन चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) चार सालों के बाद शहर में लंबे समय से खाली पड़े बूथों को नीलाम करने जा रहा है।
यह बूथ लीजहोल्ड बेसिस पर नीलाम होंगे। सीएचबी 5 से 7 फरवरी तक शहर के विभिन्न सेक्टरों और मनीमाजरा में खाली पड़े 145 बूथों की नीलामी करेगा।
सीएचबी ने हालांकि अभी इन बूथों के रिजर्व प्राइस घोषित नहीं किए हैं लेकिन स्पष्ट किया है कि इस नीलामी में इच्छुक बिडर्स को दो लाख रुपये अर्नेस्ट मनी के तौर पर पहले जमा कराने होंगे। अगर बिड करने वाला व्यक्ति नीलामी की राशि का 25 फीसदी तुरंत जमा नहीं करता है तो अर्नेस्ट मनी जब्त हो जाएगी।
सीएचबी के अधिकारियों के मुताबिक रिजर्व प्राइस मौके पर ही घोषित होगी। सीएचबी के अधिकारियों को उम्मीद है कि नीलामी में इस बार कुछ बूथ बिक जाएंगे।
कहां कितने बूथ
मनीमाजरा - 71
सेक्टर-38 (वेस्ट) - 7
सेक्टर-40 ए - 2
सेक्टर-49 बी - 8
सेक्टर-51 ए - 24
कजेहड़ी - 33
2009 और 2012 में भी की थी नीलामी
सीएचबी ने दिसंबर, 2009 में इन बूथों की नीलामी की कोशिश की थी लेकिन एक भी बूथ नीलाम नहीं हो सका था। सेक्टर-38 वेस्ट में 30.31 स्कवेयर यार्ड के बूथ का रिजर्व प्राइस 33.28 लाख था जबकि सेक्टर-49 बी में 24.292 स्कवेयर यार्ड बूथ का रिजर्व प्राइस 35.10 लाख रुपये था।
सेक्टर-51 ए में बूथ का रिजर्व प्राइस 35.08 लाख रुपये था। लेकिन तब एक भी बूथ नहीं बिका। इसके बाद 2012 में सीएचबी ने बूथों की नीलामी करने की जगह बिडर्स से सीलबंद लिफाफे में इन बूथों के लिए बिड आमंत्रित की। बोर्ड को इन 145 बूथों के लिए कुल 30 सीलबंद बिड ही मिले।
नीलामी न होने का कारण ग्राउंड रेंट
सीएचबी के इन बूथों के लिए खरीददार न मिलने का कारण यह है कि बोली में बूथ लेने वालों को हर साल ढाई परसेंट की दर से ग्राउंड रेंट भी देना होता है।
यह ग्राउंड रेंट 33 साल बाद बढ़कर पौने चार परसेंट प्रति वर्ष और 66 साल बाद अगले 33 साल के लिए पांच परसेंट हो जाता है। अगर सीएचबी इन बूथों को फ्री होल्ड कर देता है तो बूथ नीलाम हो सकते हैं।