चंडीगढ़। पीजीआई में तीन साल से चल रहा पेंशन कटौती का विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ रहा है। बिना सूचना कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन कम कर दी गई थी। इसके खिलाफ 168 पेंशनर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) पहुंच गए थे।
कर्मचारियों का कहना था कि दशकों से मिल रहे लाभ अचानक कम कर दिए गए। उनका पक्ष नहीं सुना गया और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया गया। सीएटी के निर्देशों के बाद पीजीआई प्रशासन को पूरे मामले पर दोबारा विचार करना पड़ा है। पीजीआई पहले पंजाब सरकार के अधीन काम करता था। 1967 में संसद के अधिनियम के तहत इसे स्वायत्त संस्थान का दर्जा मिला। इसके बाद भी कुछ कर्मचारियों को पंजाब वेतनमान और उससे जुड़े लाभ मिलते रहे। विवाद 2023 में पेंशन कटौती से शुरू हुआ था। कर्मचारियों और पीजीआई कर्मचारी यूनियन (गैर-संकाय) ने इसे मनमाना फैसला बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से कोई कारण बताओ सूचना भी जारी नहीं की गई थी।
सीएटी में याचिकाएं
इस फैसले के खिलाफ चार अलग-अलग याचिकाएं चंडीगढ़ स्थित सीएटी में दायर की गईं। इनमें विजय कुमार अग्रवाल समेत 84 आवेदक शामिल थे। तिलक राज शर्मा समेत पांच और तेज सिंह समेत 15 आवेदक भी थे। केसर सिंह समेत 64 आवेदकों ने भी याचिका दायर की थी। कुल 168 पेंशनरों ने प्रशासनिक फैसले को चुनौती दी थी।
अधिकरण का निर्देश
30 मई 2024 को सुनवाई के दौरान सीएटी ने पाया कि कर्मचारियों ने मई 2023 में अपना प्रतिनिधित्व सौंपा था। प्रशासन ने उस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था। सीएटी ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत आर्थिक लाभ कम न करने को कहा। अधिकरण ने पीजीआई प्रशासन को तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया। अंतिम निर्णय तक पेंशन में कटौती न करने को भी कहा गया। पीजीआई प्रशासन ने अब मामले की समीक्षा कर नया आदेश जारी किया है। इससे पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है।