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सेक्टर 17 प्लाजा, पीयू और पेक में अब मिलेगी ये नई सुविधा

Sat, 25 Jul 2015 04:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान को लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसमें प्रमुख रूप से सेक्टर 17 प्लाजा, पंजाब और पेक यूनिवर्सिटी में बैटरी चालित वाहन चलाने का एक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया। पूरे चंडीगढ़ में नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट के लिए साइकिल ट्रैक बनाने का भी फैसला लिया गया।
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खास बात यह है कि सभी प्रस्ताव दस अगस्त तक तैयार करने को कहा गया है। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन, पर्यावरण डिपार्टमेंट, नगर निगम व इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से तीन एरिया पर फोकस किया गया है। इनमें ट्रांसपोर्ट, वेस्ट टु वेल्थ और सीवरेज ट्रीटमेंट का मुद्दा शामिल रहा। प्रशासन को इन प्रोजेक्ट के लिए 160 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।

ट्रांसपोर्ट:
30 एकड़ में फैले सेक्टर 17 का प्लाज नो व्हीकल जोन बनेगा। यहां पर आने वाले लोगों को अपने वाहन पैरीफेरी रोड पर बनने वाली पार्किंग में खड़ा करना होगा। इसके लिए मल्टीलेवल पार्किंग और बनाई जाएंगी। मल्टीलेवल पार्किंग में वाहन खड़ा करने के बाद प्लाजा में किसी भी जगह पर जाने के लिए बैटरी चालित वाहन का प्रयोग करना पड़ेगा। यही नियम पीयू और पेक में भी लागू होंगे। हर एरिया में नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट एरिया डेवलप करने के तहत साइकिल ट्रैक बनाए जाएंगे। इसके अलावा बैटरी आपरेट बस चलाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
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आर्गेनिक वेस्ट
आर्गेनिक वेस्ट के निपटान पर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए शहर के बड़े-बड़े कैंपस में फूडी मशीन लगाने का प्रस्ताव बनाया गया है। यह मशीन आर्गेनिक वेस्ट को 24 घंटे के भीतर खाद में तब्दील करने काम करेगी। पर्यावरण दिवस के मौके पर इन्वायरमेंट डिपार्टमेंट की ओर से चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलाजी में मशीन लगाई गई थी। इससे आर्गेनिक वेस्ट कैंपस में ही खत्म होगा और वेस्ट उठाने वाली गाड़ियों की संख्या में कमी आएगी। इससे जीरो गारबेज सिटी बनने में मदद मिलेगी।

टर्शरी वाटर से नहीं आएगी बदबू
प्रशासन के टर्शरी वाटर के प्रोजेक्ट के फेल होने की वजह इस पानी से आने वाली बदबू है और लोग कनेक्शन नहीं लेना चाहते। इसके देखते हुए एक्शन प्लान के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड किया जाएगा। मौजूदा समय में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 30 है। अब इसे कम करके दस बीओडी किया जा रहा है। पानी में जितने ज्यादा बैक्टीरिया व सड़न होगी, पानी में बीओडी उतनी ही ज्यादा होगी। ज्यादा बीओडी का मतलब ज्यादा बदबू।
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