ऊंचा बोल-बोलकर गला खराब हो गया और आवाज निकलनी बंद हो गई। डॉक्टर ने थियेटर करने से मना कर दिया तो थियेटर के लिए लिखने लगे। ये कहानी है सेक्टर-21 में रहने वाले 24 वर्षीय पंजाबी लेखक, निर्देशक और थिएटर आर्टिस्ट दीप जगदीप की। ये एक ऐसे शख्स हैं, जो थियेटर कर नहीं सकते, लेकिन थियेटर के लिए लिखते हैं और अब तक 10 नाटक लिख चुके हैं।
दीप कहते हैं कि लिखने के लिए पढ़ना जरूरी है। लेकिन यह दुख की बात है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी पढ़ाई की किताबों के अलावा कोई और किताब पढ़ती ही नहीं। उनके लिखे हुए पंजाबी नाटक ‘आखिर कब तक’ का मंचन पंजाब में 8 हजार बार से ऊपर हो चुका है। नवंबर में उनके इसी नाटक पर आधारित पंजाबी फिल्म भी रिलीज हो रही है।
आइए उन्हीं से जानते हैं उनके जिंदगी की कहानी
जगदीप कहते हैं मैं पढ़ाई में हमेशा पीछे रहा। बीए की पढ़ाई पांच साल में पूरी की, लेकिन थिएटर में रूचि हमेशा से ही थी। पिता जसकरन सिंह प्रोफेसर हैं। पढ़ने में दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने घर में ही एक लाइब्रेरी बना रखी है। जिसका प्रभाव मुझ पर भी पड़ा और मैंने भी साहित्यिक किताबें पढ़नी शुरू कर दी। मैंने संत राम उदासी, मैक्सिम गोर्की, कार्ल मार्क्स जैसे कई लेखकों की पुस्तकें पढ़ी।
बात 2009 की है तब मैं नुक्कड़ नाटक भी खेलता था। पहले इसकी ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऊंचा बोलने के चक्कर में मैं हमेशा चिल्लाकर बोलता। मैंने एक महीना लगातार नुक्कड़ नाटक खेले। उससे मेरा गला खराब हो गया। यहां तक कि गले से आवाज तक निकलनी बंद हो गई। डॉक्टरों ने मुझे नुक्कड़ नाटक ना खेलने की सलाह दी। यह मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। तब मैंने सोचा कि थिएटर कर नहीं सकता तो क्या हुआ, थिएटर के लिए लिख तो सकता हूं।
तब मैंने प्रोफेशनली थिएटर के लिए लिखना शुरू किया, और उसी साल मैंने अपना पहला नाटक ‘सच्च दी सरदल’ लिखा। अब तक मैं 10 नाटक लिख चुका हूं। दीप जगदीप बताते हैं कि किसी नाटक या फिल्म की सफलता केवल लेखक पर नहीं बल्कि उसके निर्देशक और उसके कलाकारों पर निर्भर करती है। नाटक भले ही अच्छा या खराब लिखा हो लेकिन उसका निर्देशन सही हो तो वह सफल रहता है। एक निर्देशक ही नाटक या फिल्म की बोरियत को कम कर सकता है।
पंजाब में है कॉपी कल्चर
दीप जगदीप बताते हैं कि पंजाब में क्रिएटिविटी की बहुत कमी है। नए नाटक लिखे ही नहीं जा रहे। ज्यादातर डॉयरेक्टर भी विदेशी नाटकों का रूपांतरण कर उसे पेश कर देते हैं। इसलिए दर्शकों को भी कुछ नया देखने को नहीं मिलता।