मैं कभी अपनी क्रिएशन से प्यार नहीं करता। अगर करूंगा तो यह मेरे लिए हानिकारक होगा। यदि खुद ही अपनी क्रिएशन से मोह रखेंगे तो कैसे उसमें बदलाव करके बेहतर करेंगे। यह मेरी जिंदगी का मंत्र है। यदि कुछ अच्छा करना है तो वक्त के साथ बदलो, वरना वह चीज बे-रस हो जाएगी। कुछ इन बातों के साथ शहर के मशहूर युवा थियेटर आर्टिस्ट चक्रेश ने अपनी कामयाबी का मंत्र बताया।
अलंकार थियेटर ग्रुप के निदेशक चक्रेश को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए हाल ही में भरत मुनि अवार्ड से नवाजा गया है। वे शहर के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बेहतरीन अभिनय कर चुके है। चक्रेश ने अब तक 36 नाटक प्रस्तुत किया है।
नौवीं कक्षा से शुरू किया था रंगमंच
चक्रेश ने बताया कि भोपाल में उन्होंने आर्मी स्कूल से पढ़ाई की। यहां 9वीं कक्षा में उन्होंने नाटक करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं कर देखा। उनके पिता आर्मी में थे तो उनकी चंडीगढ़ बदली के बाद से ही वे चंडीगढ़ रह रहे हैं। यहां उन्होंने आर्मी स्कूल चंडीमंदिर में स्कूलिंग की। इसके बाद गवर्नमेंट कालेज सेक्टर-11 और इंडियन थियेटर पंजाब यूनिवर्सिटी से थियेटर की पढ़ाई की।
आर्टिस्ट ने बताया कि उन्होंने कालेज से ही रंगमंच को करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने कभी थियेटर को नहीं छोड़ा। वे बेशक कई बार हारे, लेकिन इस हार के बाद भी उन्होंने जीतने की चाह हमेशा रखी। चक्रेश ने बताया कि उनके गुरु शहर के सभी थियेटर आर्टिस्ट रहे। मशहूर आर्टिस्ट कमल तिवाड़ी से लेकर पद्मश्री नीलम मान सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी, रानी बलबीर कौर सहित उनके कई गुरु रहे। इनसे उन्होंने रंगमंच को जीना सीखा।
2004 में पूरे साल में हमने कमाए थे नौ हजार रुपये, वो जाकर दिए थे मां को
थियेटर में पैसे नहीं सम्मान और मन की शांति है। चक्रेश ने बताया कि 2004 में मशहूर थियेटर आर्टिस्ट रानी बलबीर कौर के साथ नाटक किया था, जिसमें उन्हें एक हजार रुपये मिले थे। इस साल में उन्होंने नुक्कड़ नाटक भी किए। इस दौरान करीब नौ हजार रुपये पूरे साल में कमाई हुई, जिसे अपनी मां को दिया और कहा, मां ये मेरी पहली कमाई है।
थियेटर सीखने और सिखाने की कला है, पैसे यहां नहीं
चक्रेश ने कहा कि थियेटर उनकी जिंदगी है, लेकिन यह कड़वी सच्चाई भी है कि यहां पैसे की उम्मीद आप नहीं कर सकते हैं। ऐसे में थियेटर जो करना चाहते हैं, वे सिर्फ सीखने आएं। उनके थियेटर ग्रुप में पैसे कलाकारों को दिए नहीं जाते बल्कि यह ग्रुप खुद के पैसों से नाटक का निर्माण करता है। ग्रुप में हर चीज का मनी बैंक बना हुआ है, जिसमें सभी कलाकार मदद करते हैं। थियेटर आपको अभिनय नहीं जिदंगी जीना सिखाता है।