मार्शल आर्ट चैम्पियन और गोल्ड मेडलिस्ट से मिलिए, जो गरीब बच्चों के लिए वो काम कर रही है, जानेंगे तो सेल्यूट करेंगे। इनका नाम है अमिता मारवाह। पंचकूला निवासी ये ताइक्वांडो प्लेयर कहती हैं कि कई बार ऐसा होता है कि पैसे की कमी के कारण ये बच्चे खेल में भाग नहीं ले पाते। तब हौसला डगमगाने लगता है, लेकिन अगले दिन सुबह उम्मीद की नई किरण के साथ उठती हूं और इन बच्चों के कैरियर को संवारने में जुट जाती हूं।
अमिता 2011 से झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग मुफ्त में दे रही हैं। वह बतातीं हैं कि इन बच्चों को मुश्किल से दो वक्त की रोटी मिल पाती है। अमिता कहती हैं कि सिर्फ इसी उम्मीद से इन बच्चों को ट्रेनिंग दे रही हैं, कि एक दिन ये बच्चे खेल में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और देश का नाम रोशन करें। साथ ही इनका कैरियर भी बनेगा और परिवार को बेहतर जिंदगी दे पाएंगे। अब तक अमिता के स्टूडेंट ट्राइसिटी, दिल्ली, नेपाल, गाजियाबाद, श्रीलंका, कोरिया तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए जा चुके हैं।
पैसे की कमी आड़े आती है
अमिता ने बताया कि जब वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही थीं तो उनके कई दोस्त ऐसे थे, जो पैसे की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। इसलिए उन्होंने फैसला लिया कि उन बच्चों को आगे बढ़ाऊंगी, जिनके पास प्रतिभा तो है लेकिन पैसे की कमी उनके प्रतिभा के आड़े आ रही है। लेकिन यह संभव हो पाया शादी के बाद। इस काम में अमिता के पति पीसी मारवाह उनका पूरा साथ देते हैं। अमिता इन बच्चों को ट्रेनिंग के साथ साथ किट भी खरीदकर देती हैं।
दो युवा ट्रेनर देते हैं पूरा साथ
अमिता ने बताया कि इन बच्चों को ट्रेनिंग देने में उनकी मदत तीन युवा ट्रेनर करते हैं। आशीष, कमलेश और सूजर। इस काम में उनकी बेटी हिमांशी भी साथ देती है।
पांच घंटे ट्रेनिंग के लिए देती हैं समय
बच्चों को दो जगह अमिता ट्रेनिंग देती हैं। पंचकूला में सुबह ढाई से साढ़े तीन बजे तक और हल्लोमाजरा में साढ़े पांच से सात बजे तक। अभी हाल ही में अमिता ने कोरिया में आयोजित ताइक्वांडो चैंपियनशिप के सीनियर कैटेगरी में स्वर्ण पदक हासिल किया है।
एक का नेशनल के लिए चयन
चंडीगढ़ में आयोजित स्टेट जूनियर ताइक्वांडो चैंपियनशिप में अमिता की एक छात्रा नेहा ने गोल्ड मेडल हासिल किया है। इसी आधार पर पंजाब में होने वाले नेशनल जूनियर चैंपियनशिप के लिए उसका चयन किया गया है।