मिलिए एक ऐसे उद्योगपति से, जिसने अपने पैतृक गांव की बदहाली देखकर उसे गोद ले लिया और अब कायाकल्प के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने जा रहे हैं। बात हो रही है, उद्योगपति नरेंद्र अग्रवाल की। इन्होंने अपने पूर्वजों के गांव में सुधार करने के लिए 13 करोड़ का एस्टीमेट बना लिया है।
इसमें तमाम प्रोजेक्ट शामिल किए हैं, जो कई शहरों में भी नहीं है। सीसीटीवी कैमरे से लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट समेत स्किल डेवलपेमेंट सेंटर तक स्थापित करने की योजना है।
पूरे प्रोजेक्ट का खर्चा उद्योगपति अग्रवाल की शिवालिक प्रिंट लिमिटेड कंपनी के सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी) के तहत वहन किया जाएगा। बस इंतजार है तो बरसाती सीजन के समाप्त होने का।
जैसे ही बारिश का सीजन समाप्त होगा, प्रोजेक्ट काम शुरू हो जाएगा। जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर दस हजार की आबादी का यह गांव अति पिछड़े गांव में शामिल है।
70 साल पहले दादा गांव छोड़कर फरीदाबाद चले गए थे
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
नरेंद्र अग्रवाल के दादा लाला साधुराम 70 साल पहले गांव को छोड़कर व्यापार के लिए फरीदाबाद चले गए। वहां पर उन्होंने कपड़े का व्यवसाय शुरू किया तो वह चल निकला। इनके बाद उनके बेटे रामनिवास गुप्ता ने कारोबार को संभाला और बुलंदियों तक पहुंचा दिया। अब कंपनी का कारोबार लाला साधुराम के पौते नरेंद्र अग्रवाल देख रहे हैं।
दो माह पहले वे गांव में उनके परिवार द्वारा बनवाए गए मंदिर और नवनिर्मित गौशाला को देखने आए। गांव के हालात देखकर उन्होंने इसे साफ सुथरा बनाने और आदर्श बनाने की ठानी। आचार्य रामनिवास के साथ हुए मंथन के बाद नरेंद्र अग्रवाल ने अपने पुरखों के गांव को गोद लेने की बात कही और उस पर काम शुरू कराया।
एक माह तक गांव में एक निजी कंसल्टेंसी और कंस्ट्रक्शन कंपनी के इंजीनियर की टीम ने पूरे गांव का सर्वे किया और यहां की समस्याएं और समाधान तलाशे। गांव में सड़कों को पक्का करने, घर-घर पानी पहुंचाने, घर घर से कूड़ा उठाने समेत पानी की निकासी और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ साथ गांव में दो पार्क और सामुदायिक केंद्र भी स्थापित करने की योजना है।
रोशनी में नहाएगा गांव, युवाओं को ट्रेनिंग
हरचंदरपुर गांव
- फोटो : अमर उजाला
पूरे गांव में वाईफाई, सीसीटीवी युक्त और चमकदार रोशनी देने वाली साढ़े सात लाख रुपये की 250 एलईडी लाइटें लगाने का भी प्रस्ताव है। गांव के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर तीन स्किल डेवेलपमेंट सेंटर खोले जाएंगे।
गांव के बच्चों के लिए क्रैच होगा और एक नई डिसपेंसरी भी, ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके। कंपनी ने गांव के लिए पूरा प्रोजेक्ट तैयार करके सरपंच और नरेंद्र अग्रवाल को सौंप दिया है। पूरे प्रोजेक्ट पर 12 करोड़ 80 लाख रुपये ज्यादा की राशि खर्च की जाएगी।