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शीतल प्रकाश: वन मैन आर्मी की तरह पर्यावरण को संभाल रहे

Tue, 15 Mar 2016 09:20 AM IST
कंवरपाल /अमर उजाला, हलवारा(लुधियाना)
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बाशिंदे, शीतल प्रकाश - फोटो : अमर उजाला
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लुधियाना से 25 किलोमीटर दूर बसे छोटे से कस्बे सुधार बाजार के कारोबारी शीतल प्रकाश अपने जीवन को पर्यावरण के नाम समर्पित कर चुके हैं। सुधार बाजार में मोबाइल फोन और वेस्टर्न यूनियन के कारोबारी 45 साल के शीतल प्रकाश पर्यावरण संरक्षण, पक्षियों के लिए घोंसले बनाने और लावारिस जानवरों की देख रेख पर अपनी कमाई के 40 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं।
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बेशक आज उनके पास घर और दुकान के बिजली बिल देने के अलावा अपनी जरूरतों को पूरा करने तक का पैसा नहीं बचा, लेकिन  पर्यावरण संरक्षण का काम निरंतर जारी है। मूल रुप से रायकोट के रहने वाले और ग्रीन मैन के नाम से प्रसिद्ध शीतल प्रकाश ने 1999 में सुधार बाजार के कुछ लोगों द्वारा एक पेड़ काटने से निराश होकर ठाना था कि अब यहां कोई पेड़ पौधा नहीं कटेगा। अपने इसी जनून के चलते शीतल प्रकाश ने शादी तक नहीं की।

सुधार बाजार स्थित शिव मंदिर की दीवार के साथ जंगलात विभाग की जिस डेढ़ एकड़ जमीन पर पूरे इलाके के कचरे का डंप था, उसे लाखों रुपये लगाकर शीतल प्रकाश ने साफ करवाया और वहां बगीचा बनवाया। उन्हें कई लोगों के कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा। लोगों ने उनके द्वारा लगाए पौधे नष्ट कर दिए, लेकिन शीतल प्रकाश ने हार नहीं मानी। सुधार बाजार की जिस नर्सरी को जंगलात विभाग द्वारा बंद कर जगरांव शिफ्ट कर दिया गया था।
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उसे सरकार से अपील कर वापस सुधार बाजार लेकर आए। जंगलात विभाग की मदद और अपने पैसे खर्च कर नर्सरी को दोबारा आबाद किया। शिव मंदिर के पास बनाए बगीचे को कटहल के पौधों से आबाद किया। इस सब के बीच उनका कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित होता रहा।

सम्मान
2013 में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पंजाब सरकार द्वारा स्टेट अवार्ड दिया गया।
2013 में ही उन्हें ग्रीन आइडल पंजाब का सम्मान मिला।
2013 में हेल्थ मिनिस्टर मदन मोहन मित्तल ने आनंदपुर साहिब में शीतल को सम्मानित किया।
2014 में विधानसभा के स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल ने उन्हें सम्मानित किया।
2015 में गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी ने उन्हें चंडीगढ़ में सम्मानित किया।
उन्हें नोबल इंडियन अवार्ड भी मिल चुका है।

पक्षियों और जानवरों से भी है प्यार
शीतल प्रकाश ने इलाके में पक्षियों के लिए सैकड़ों लकड़ी और मिट्टी के घोंसले बनवाएं। 10 हजार से अधिक लकड़ी और मिट्टी के घोंसले बनवाकर पूरे पंजाब में बांटे। बंदरों के लिए फलों और खाने का प्रबंध किया और चोट लगने की सूरत में लावारिस पशुओं का इलाज करवाया।
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अगर इस धरती को बचाना है तो पर्यावरण, पक्षियों और जानवरों को भी बचाना होगा। कुदरत का संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए।
-शीतल प्रकाश
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