हाईकोर्ट ने कहा कि देखने में आया है कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में हिंसा, अश्लीलता, नशे और शराब का महिमा मंडन बढ़ रहा है। सरकार को इस प्रकार की प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए थी। लेकिन किसी राज्य ने भी ऐसा नहीं किया। इसका सबसे बुरा प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ रहा है।
शादी, धार्मिक आयोजनों में हथियार ले जाने पर पाबंदी
कोर्ट ने कहा कि शादियों या इस प्रकार के आयोजनों में कुछ लोग झूठी शान दिखाने के लिए हथियारों का प्रदर्शन करने लगते हैं। ऐसी जगह गोली चलने से लोगों की मौत होने की खबरें आम हो गई हैं। हाईकोर्ट ने अब ऐसे लोगों पर सख्ती करते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजनों, शादियों और शिक्षण संस्थानों में किसी भी तरह के हथियार ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।
लाइसेंस के नियम होंगे और सख्त
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी यह सुनिश्चित करे जिस व्यक्ति को हथियार दिया जा रहा है उसकी आयु 21 साल से कम न हो। इसके साथ ही ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे किसी भी आपराधिक और नैतिक पतन के मामले में अदालत दोषी करार दे चुकी है उसे हथियार का लाइसेंस न दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि हथियार विशिष्ट परिस्थिति में दिया जाता है लेकिन हथियार रखना कोई सांविधानिक अधिकार नहीं है।