नियम बनते हैं और लागू भी होते हैं, लेकिन नियमों का कोई पालन भी कर रहा है या नहीं, इस पर अफसर ध्यान ही नहीं देते।
अनदेखी के कारण पॉलीथिन पर प्रतिबंध तो महज नाम का ही रह गया, डिस्पोजल प्लास्टिक कप पर भी प्रतिबंध है, लेकिन नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई ही नहीं होती।
यह हाल तब है, जब कार्रवाई के लिए नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हुडा को भी चालान काटने के लिए अधिकृत किया गया है।
डिस्पोजल प्लास्टिक कप पर पिछले साल प्रतिबंध लगा था। प्रदेश सरकार ने पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाते हुए गार्बेज कंट्रोल एक्ट के तहत नोटिफिकेशन जारी किया था।
प्लास्टिक के डिस्पोजल कप में चाय सर्व करना भी गैर कानूनी है, लेकिन बाजारों में यह जहां-तहां नजर आ जाएंगे।
कैरी बैग्स में माइक्रोन का खेल खत्म
पिछले साल स्थानीय निकाय विभाग की ओर से गार्बेज कंट्रोल एक्ट-2013 के तहत नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके बावजूद इस दिशा में कार्रवाई ढीली रही है।
नए प्रावधान के तहत प्लॉस्टिक के कैरी बैग्स में अब माइक्रोन नहीं, बल्कि किसी भी तरह के पालीथीन बैग का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
नए नोटिफिकेशन के तहत चाय या कॉफी सर्व करने के लिए प्लास्टिक कप का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
पॉलीथिन बैग्स का भी धड़ल्ले से उपयोग
बाजार हो या साप्ताहिक मंडी, हर जगह पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। लगता ही नहीं कि प्रतिबंध नाम का कोई नियम भी है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है और अब नए सिरे से इस दिशा में और सख्ती बरती जाएगी।
नए नियम के अंतर्गत न केवल रिटेलरों पर, बल्कि पॉलीथीन बनाने वाली कंपनियों पर भी जुर्माने का प्रावधान है।