फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खुलवाकर यूटी प्रशासन के 2 करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने के दो आरोपियों को जिला अदालत से जमानत मिल गई। उन्हें 50-50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत के आदेश हुए हैं। मामले में कुल छह आरोपी थे। इनमें से संदर्श और संतोष को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि प्रेम कुमार की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब मुस्तफा और अजय कुमार को भी जमानत मिली गई।
वहीं एक अन्य आरोपी प्रताप की जमानत पर फैसला होना बाकी है। यूटी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने पिछले महीने यूटी प्रशासन के चार करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने के मामले में इन 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। साथ ही उनसे 10.50 लाख रुपये बरामद किए थे। इनकी गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब इनमें से दो आरोपी बैंक से चेक कैश कराने आए। पुलिस ने उन्हें वहीं से गिरफ्तार किया था। इसके बाद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
यह था मामला
पांच मई को प्रेम ने यूटी प्रशासन के अकाउंट ब्रांच का पासवर्ड और मेल आईडी पता कर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर दो फर्जी खातों में दो-दो करोड़ रुपये ट्रांसफर कर लिए। शाम को अकाउंट डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को इसका पता चला तो उन्होंने अधिकारियों को करोड़ों के ट्रांजेक्शन होने की सूचना दी। जांच में पता चला कि दो करोड़ की ट्रांजेक्शन नहीं हो पाई थी। सिर्फ यूनियन बैंक के एक खाते में दो करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे। हालांकि जालसाज 2 करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन करने में सफल हो गए थे, जबकि अन्य दो करोड़ की ट्रांजेक्शन रुक गई थी। इसके बाद आरोपियों ने 12 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिये निकाल लिए थे। वहीं 32 लाख का चेक सेक्टर-35 स्थित यूनियन बैंक की शाखा में लगाया था। इसे कैश कराते वक्त पुलिस ने प्रेम सिंह और अजय कुमार को गिरफ्तार किया था।