आदि बद्री व सरस्वती उद्गम स्थल का जल्द ही कायाकल्प होगा और क्षेत्र को पूरी तरह से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह बात साढौरा हलका विधायक चौधरी बलवंत सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना करते हुए कही।
उनके साथ प्रशासन की ओर से एसडीओ एसके गोयल, विपिन सिंगला, रविभूषण अग्रवाल, अश्वनी मंगला भी मौजूद रहे। विधायक ने कहा कि क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एसडीओ पंचायतीराज को तुरंत एस्टिमेट बनाने के निर्देश दे दिए हैं।
संबंधित कार्यों का पूरा एस्टिमेट तैयार होने के बाद प्रदेश सरकार से ग्रांट पास करवाकर आदि बद्री व सरस्वती उद्गम स्थल को पूरी तरह से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अजात आश्रम का दौरा किया जिसकी दशा सुधारने को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए एक विशेष योजना बनाई जाएगी और जल्द से जल्द इसके सौंदर्यीकरण का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही विधायक ने सरस्वती नदी को प्रदूषित कर रहे कस्बे के दो नालों को दूर ले जाने के दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पवित्र नदी में दूषित जल व अन्य गंदगी को गिराया जाना गलत है। नालों को दूर करने के साथ-साथ स्वच्छ पानी की उपलब्धता के लिए एक नलकूप भी लगाया जाएगा। इस मौके पर सरपंच राज कुमार राणा, पंकज मंगला, चमन लाल, महिंद्र सिंह, रोबिन अग्रवाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
पर्यटकों को मिलेंगी ये सुविधाएं
- मंदिर के समीप सरोवर बनाकर उसे पक्का किया जाएगा जिससे पूरा वर्ष स्वच्छ जल मिलेगा।
- अजात आश्रम में मंदिर में सरस्वती नदी के दोनों तरफ पक्के घाटों का निर्माण होगा।
- एक नलकूप लगाया जाएगा जिससे पूरा वर्ष साफ-सुथरा जल उपलब्ध होगा।
- बिलासपुर कस्बे की ओर से गंदे पानी के जो दो नाले सरस्वती नदी में गिर रहे हैं, उनका रुख बदला जाएगा।
- सरस्वती नदी के तट के किनारे ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।
- मंदिर प्रांगण से साढौरा मुख्य मार्ग तक सीधी सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
- साफ-सफाई के लिए जगह-जगह डस्टबिन रखे जाएंगे तथा कचरा उठान के लिए व्यवस्था बनेगी।
- पर्यटकों को सही रास्ते का पता चल सके, इसके लिए जगह-जगह सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे।
असुविधाओं से श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
मंदिर के महंत विद्या नंद सरस्वती ने कहा कि आदिबद्री व सरस्वती उद्गम स्थल का विकास होना अति आवश्यक है क्योंकि इससे लाखों लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। साल के 12 माह यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है, जिन्हें यहां आकर असुविधाओं के कारण दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।
लोगों की आस्था का केंद्र है सरस्वती नदी
सरस्वती शोध संस्थान के अध्यक्ष दर्शन लाल जैन का कहना है कि सरस्वती नदी की पवित्र धारा को धरातल पर लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। इसके उद्गम स्थल को पर्यटन क्षेत्र में विकसित होने से इस दिशा में सुधार होगा चूंकि इस पवित्र नदी से लाखों लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी है।
क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए संबंधित कार्यों के लिए पंचायतीराज एसडीओ व अन्य अधिकारियों से जल्द एस्टिमेट बनाने को कहा है। प्रदेश सरकार से ग्रांट पास करवा जल्द ही क्षेत्र की कायाकल्प का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
- चौधरी बलवंत सिंह, विधायक, साढौरा