वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में हमारे खिलाड़ियों के खिताब नहीं जीतने का मलाल जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खिलाड़ी बेहतर नहीं हैं। विश्व स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और पीवी सिंधू आज विश्व की चोटी के खिलाड़ियों को हराने का दम रखती हैं। यह बात भारतीय बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ने कही। पुलेला चंडीगढ़ में खेले जा रहे ऑल इंडिया जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों की हौसला अफजाई केलिए वीरवार को सेक्टर 43 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचे।
गोपीचंद ने कहा कि देश में काबिल कोचों की कमी है। देश में अच्छे कोच तो हैं, लेकिन बेहतर तकनीक भी जरूरी होती है। इन दोनों के तालमेल से ही पीवी सिंधू जैसे कई खिलाड़ी सामने आ सकेंगे। तकनीक से ही कोच नए टैलेंट का उभारने का काम कर पाएंगे। खिलाड़ियों में सुधार की बहुत जरूरत है। खिलाड़ियों को शारीरिक रूप से मजबूत होना चाहिए। पिछले पांच से छह बड़े टूर्नामेंट में भारत के खिलाड़ियों के फाइनल में हारने पर गोपीचंद ने कहा कि वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स के अहम चरण पहुंच कर हारने का कारण लंबा शेड्यूल था, जिसमें खिलाड़ी थक कर हार गए।
इसके साथ ही कहा कि हम यह क्यों नहीं कहते कि हमारे खिलाड़ी फाइनल तक पहुंचने में सफल रहे। चंडीगढ़ में चल रहे जूनियर बैडमिंटन टूर्नामेंट में उनके बेटे साई विष्णु पुलेला और बेटी गायत्री पुलेला भी हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान गोपीचंद की मां सुब्बारवम्मा और पत्नी पीवी लक्ष्मी भी मौजूद रहीं। इस मौके पर बैडमिंटन खिलाड़ियों ने गोपीचंद से सफलता के मंत्र भी लिए।
बेटे और बेटी के बैडमिंटन को चुनने पर खुशी
जब उनसे विष्णु और गायत्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दोनों मेरी अकादमी में अन्य खिलाड़ियों की तरह ही हैं। अकादमी में कुल 50 बच्चे हैं। मुझे हर ट्रेनी में अपने बच्चे नजर आते हैं। गोपीचंद ने कहा कि वे दोनों अभी जूनियर में खेलते हैं। सीनियर टीम का नेशनल कोच होने के नाते मैं जूनियर टीम के साथ अधिक नहीं रहता, लेकिन मुझे खुशी है कि विष्णु और गायत्री ने बैडमिंटन खेल को चुना। आशा करता हूं कि वे अपनी मेहनत से आगे बढ़ते जाएं।