आईएसआई ही पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों को परेशान करने के पीछे है। कश्मीर में लश्कर व जैश-ए-मोहम्मद और पंजाब में खालिस्तान समर्थकों को आईएसआई ही सारी मदद मुहैया करवाती है। पंजाब में गड़बड़ी फैलाने की मंशा रखने वाले विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थक पहले कश्मीरी कट्टरपंथियों के संपर्क में नहीं थे।
लेकिन जब पंजाब में आईएसआई की साजिश कामयाब नहीं हुई तो उसने इनका गठजोड़ कराया, ताकि पंजाब में किसी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कश्मीरी कट्टरपंथियों के जरिए हथियार मुहैया करवाया जा सके और उनके नेटवर्क का भी फायदा यहां उठाया जा सके। कुछ समय पहले जालंधर के मकसूदां थाने में बमों से हमला हुआ था।
यह पंजाब में बमों से हमले का पहला मामला था जबकि, जम्मू-कश्मीर में हमले का यही पैटर्न कई सालों से चला आ रहा है। बाद में हमले के पीछे कश्मीरी ही निकले।
2018 में पुलिस ने पटियाला से एक खालिस्तान समर्थक को गिरफ्तार किया था, उसके पास से भी बम मिला था। 2017 में पटियाला का युवक संदीप शर्मा जम्मू-कश्मीर जाकर आदिल बन गया था। उसने लश्कर ज्वाइन कर लिया था। तब पंजाब पुलिस को पहली बार आशंका हुई थी कि लश्कर जैसे संगठन कहीं खालिस्तानी स्लीपर सेल के संपर्क में तो नहीं हैं।
पिछले ही साल अमृतसर में निरंकारी भवन पर भी बम से हमला हुआ, हालांकि उसका पैटर्न टारगेट किलिंग जैसा था। लेकिन तब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद माना था कि पंजाब और कश्मीर के चरमपंथियों के बीच गठजोड़ वाकई चिंता का विषय है क्योंकि किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार मुहैया कराने से लेकर ट्रेनिंग देने तक, सब कुछ आसानी से किया जा सकता है।