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Ram Mandir Bhumi Pujan: राम मंदिर बनाने को पैदल अयोध्या पहुंच गए थे लाखों कारसेवक

Wed, 05 Aug 2020 11:23 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • प्रभु श्री राम के लिए गजब थी हरियाणवियों की दीवानगी
  • आंदोलन के दौरान लखनऊ के बाद रोक दी थी ट्रेनें
  • आंदोलन में पांच हजार कारसेवक पहुंचे थे रामनगरी
  • सरस्वती नदी समेत कई पवित्र सरोवरों का जल भेजा गया
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अयोध्या में भूमि पूजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिसंबर 1992 में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए चलाए गए श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में हरियाणा के लोगों की गजब की दीवानगी देखने को मिली थी। हरियाणा से करीब पांच हजार कारसेवकों ने इस आंदोलन में भाग लेने के लिए ट्रेनों में अयोध्या कूच किया था। चूंकि देशभर से कारसेवकों का जत्था अयोध्या पहुंच रहा था। ऐसे में माहौल बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर अधिकतर ट्रेनें लखनऊ में ही रोक दी जाने लगीं।
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हरियाणा के कई कारसेवकों को भी अयोध्या में ही रोक दिया गया। लेकिन श्रीराम के प्रति आस्था और जुनून इतना गहरा था कि हरियाणवी गांव-दर-गांव होते हुए पैदल ही अयोध्या की ओर बढ़ने लगे। आंदोलन के आयोजकों ने हर प्रांत से कुछ ऐसे लोगों की टीम को करीब 20 से 25 दिन पहले ही अयोध्या बुला रखा था, जिन्हें अपने प्रांत से आने वाले कारसेवकों के लिए व्यवस्थाओं का इंतजाम करना था।

हरियाणा से भी इसके लिए संघ के दो नेताओं गोविंद भारद्वाज (महेंद्रगढ़) और सुरेश वत्स (सिरसा) की ड्यूटी लगाई गई थी। इन व्यवस्थापकों के अलावा हरियाणा से अयोध्या पहुंचे कारसेवकों का नेतृत्व करने वालों में ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल, अनिल विज, रामबिलास शर्मा, कंवरपाल गुर्जर, कैलाश कुमार समेत संघ और भाजपा के कई आला नेता शामिल थे।
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बच्चा-बच्चा आंदोलन में भाग लेने पहुंचा था

हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कॉरपोरेशन के पूर्व चेयरमैन व गुड गवर्नेंस हरियाणा के अध्यक्ष गोविंद भारद्वाज ने बताया कि उसकी ड्यूटी पहले तो लखनऊ स्टेशन पर थी। वहां हरियाणा समेत कई राज्यों से हज़ारों कारसेवक पहुंच रहे थे। लेकिन इन कारसेवकों को अयोध्या तक पहुंचने में दिक्कतें आ रही थी। कारसेवकों के लिए लंगर लगाना, उनके ठहरने की व्यवस्था करना समेत उन्हें कैसे आयोध्या तक लेकर जाना है, एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।

इसके लिए उन लोगों ने कारसेवकों को पैदल अयोध्या तक पहुंचाया। गांवों में भोजन और उनके रुकने की व्यवस्था के लिए शिविर लगाए गए। लेकिन रामभक्तों में जुनून ऐसा था कि किसी को भी कई किलोमीटर पैदल चलने के बावजूद थकान का अहसास नहीं हो रहा था। संघर्ष आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश वत्स ने बताया कि गांवों में लोगों के लिए ठहरने और लंगर की व्यवस्था करने के लिए समाजसेवी लोगों ने आर्थिक रूप से भी मदद की।

श्सिरसा के बाजेगा गांव से एक किशोर त्रिभुवन सिंह घरवालों को बिना बताए इस आंदोलन में भाग लेने अयोध्या पहुंच गया। उसके जैसे बहुत से किशोर इस आंदोलन में पहुंचे। बच्चा-बच्चा राम जन्म भूमि के नारे लगाते हुए भाग लेने आया था। अयोध्या पहुंचने के बाद हरियाणा के व्यवस्थापकों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो। इसके लिए तत्कालीन संघ के प्रांत प्रचारक मनोहरलाल (वर्तमान में मुख्यमंत्री) ने उन्हें एक पत्र भी दिया था।
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प्रतीकात्मक कारसेवा की घोषणा सुन नाराज हो गए थे लोग

व्यवस्थापक सुरेश वत्स ने बताया कि जैसे-तैसे लाखों लोग जब अयोध्या पहुंचे तो वहां शीर्ष नेताओं ने प्रतीकात्मक कार सेवा का एलान कर दिया। यह सुनकर कारसेवक काफी नाराज हो गए। नाराजगी की वजह यह भी थी कि 1989 और 1990 में भी श्री राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवकों को अयोध्या बुलाया गया था।

अब साल 1992 में तो हरियाणा के कारसेवक यही ठान कर गए थे कि इस बार तो श्रीराम मंदिर का निर्माण करके ही वापस लौटेंगे। गोविंद भारद्वाज और सुरेश वत्स ने बताया कि आखिरकार वह दिन करीब 28 साल बाद अब आ गया है, जब श्री राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। उनके अनुसार श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए चलाए गए आंदोलन में हरियाणा के लोगों का भी सराहनीय योगदान रहा है।

हरियाणा से पहुंच चुका पवित्र जल और मिट्टी
हरियाणा से पवित्र नदी सरस्वती का जल अयोध्या पहुंच चुका है। भूमि पूजन में इस जल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह हरियाणा के विभिन्न प्रख्यात धार्मिक सरोवरों का जल और धार्मिक स्थलों की मिट्टी भी अयोध्या पहुंचाई गई है। इसके अलावा विभिन्न जिलों से लोगों ने लाखों रुपये एकत्रित कर मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या भेजे हैं।
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