फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पटाखों की आवाज में दबा जागरूकता अभियान

Wed, 06 Nov 2013 11:27 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन
दिवाली की रात में इस साल ध्वनि और वायु प्रदूषण पिछले साल की तुलना में बढ़ गया।
विज्ञापन


चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) की ओर से इस साल तीन स्थानों पर प्रदूषण की मात्रा को मापने के यंत्र लगाए गए थे और तीन जगह ध्वनि और वायु प्रदूषण की मात्रा पिछले साल से अधिक थी।

इसका मतलब यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन के पर्यावरण विभाग और एनजीओ की ओर से पटाखे न चलाने के संबंध में चलाए गए जागरूकता अभियान का लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
विज्ञापन


दिवाली की रात लोगों ने खूब पटाखे चलाए। सीपीसीसी की ओर से जारी डाटा के तहत इस साल सेक्टर-29 में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया जबकि सेक्टर-22 में सबसे अधिक वायु प्रदूषण दर्ज हुआ।

280 से बढ़कर 450 माइक्रोग्राम हुआ वायु प्रदूषण
सीपीसीसी की ओर से शहर के तीन अलग अलग स्थानों पर वायु प्रदूषण के सैंपल एकत्र किए गए थे।

वर्ष 2012 में जहां रेस्पिरेबल सस्पेंडड पार्टिक्यूलेट मैटर (आरएसपीएम) की अधिकतम मात्रा 280 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी, वहीं इस साल यह 450 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई है।

यह मात्रा सेक्टर-22 में दर्ज की गई।  इस साल सेक्टर-29 में आरएसपीएम की मात्रा 409 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर दर्ज की गई जबकि पिछले साल यह 349 था।

सेक्टर-17 में आरएसपीएम लेवल 165 माइक्रोग्राम था जो कि पिछले साल 207 था। वर्ष 2011 में  आरएसपीएम की मात्रा 310 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी। शहर में औसतन आरएसपीएम की मात्रा 150 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहती है।

75.9 से बढ़कर 77.5 डेसीबल हुआ ध्वनि प्रदूषण
इसी तरह से पिछले साल दिवाली की रात ध्वनि प्रदूषण की अधिकतम मात्रा 75.9 डेसीबल थी जो कि इस साल बढ़ कर 77.5 डेसीबल हो गई थी।

यह सेक्टर-29 में दर्ज हुआ। सेक्टर-22 में इस साल ध्वनि प्रदूषण की मात्रा 76.6 डेसीबल थी जो कि पिछले साल 75.9 थी। सेक्टर-17 में इस साल सबसे कम ध्वनि प्रदूषण दर्ज हुआ। यहां ध्वनि प्रदूषण की अधिकतम मात्रा 69.3 डेसीबल थी जबकि पिछले साल यह 64.8 डेसीबल थी।


इन तीन जगह लगाए थे यंत्र
इस साल चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से सेक्टर-22, 17 और 29 में ध्वनि और वायु प्रदूषण को मापने के लिए यंत्र लगाए गए थे।

सेक्टर-22 में रिहायशी क्षेत्र और सेक्टर-17 में कामर्शियल क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा मापने के लिए यंत्र लगे थे। समिति की ओर से एक-दो दिन में आधिकारिक तौर पर आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे।

साइलेंस जोन में भी चले पटाखे
सेक्टर-29 में अस्पताल के पास यंत्र लगाया गया था जिससे यह पता चल सके कि साइलेंस जोन में आने वाले क्षेत्रों में पटाखे चले या नहीं।

सेक्टर-29 में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण हुआ जिससे यह स्पष्ट है कि साइलेंस जोन में भी खूब पटाखे चले हैं। प्रशासन ने साइलेंस जोन में पटाखे चलाने पर रोक लगाई थी।
विज्ञापन


साइलेंस जोन में आने वाले क्षेत्रों में कैपिटल कांपलेक्स, राजेंद्र पार्क, चंडीगढ़ क्लब, पंजाब यूनिवर्सिटी, सेक्टर-12, सुखना लेक के आसपास का एरिया शामिल है।

साथ ही अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थाओं, कोर्ट और धार्मिक स्थलों से 100 मीटर तक की दूरी पर भी पटाखे चलाने पर प्रतिबंध था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें