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किसी को नीचा दिखाने के लिए फेक कंटेंट को वायरल करने से बचें, यह अपराध

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड मैनेजमेंट साइंसेज (यूआईएमएस) में मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम इंवेस्टिगेशन सेल के सहयोग से अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से साइबर क्राइम जागरुकता पर पुलिस की पाठशाला का आयोजन करवाया गया। इस दौरान साइबर क्राइम एक्सपर्ट विकास सांगवान ने छात्रों को बताया कि किसी को नीचा दिखाने के लिए अगर आप सोशल मीडिया पर उसका फेक अकाउंट बनाकर खराब कंटेट या फोटोज अपलोड करते हैं तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा किसी को बदनाम करने वाला कंटेट, फोटो, वीडियो आदि को वायरल करने से बचें। इसके लिए जेल भी हो सकती है, इसलिए हमेशा वायरल कंटेट को शेयर करने से बचें।
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साइबर एक्सपर्ट विकास ने बताया कि अपना पासवर्ड हमेशा बचाकर रखें। उसके कैरेक्टर्स ऐसे हों कि कोई हैक न कर पाए। इससे आपका सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने से बचेगा और आपके साथ अपराध होने की संभावना कम होगी। सोशल मीडिया पर अपनी फोटो और निजी जानकारी को निजी रखें, किसी के साथ इसे साझा नहीं करें क्योंकि आजकल सोशल मीडिया से फोटो लेकर फेक अकाउंट बनाकर उसी आदमी के जानकारों से पैसे मांगने और ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। अपराधी सोशल मीडिया से फोटो और कंटेट चुराकर फेक प्रोफाइल बनाता है और आप ही के दोस्तों को फ्रेंड रिक्वसेट भेजकर उनके साथ अपराध को अंजाम देता या ब्लैकमेल करता है। कार्यक्रम में पीयू के रजिस्ट्रार डॉ. वाईपी वर्मा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने छात्रों को बताया कि ऑनलाइन अपराधों में सबसे अधिक फाइनेंशियल फ्राड हो रहे हैं इसलिए हमेशा सिक्योर नेटवर्क और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें। वहीं साइबर अपराध से बचाव का एक ही तरीका है जागरूक होना। इसलिए कोई भी जानकारी साझा करते समय हमेशा सतर्क रहें। यूआईएमएस निदेशक प्रोफेसर मोनिका अग्रवाल ने मुख्यातिथि और वक्ताओं का आभार जताया।
शादी की वेबसाइट पर नहीं बनाएं प्रोफाइल
एएसआई गुलाब सिंह ने बताया कि युवाओं के साथ शादी की वेबसाइट के जरिए भी बहुत से अपराध हो रहे हैं। अपराधी शादी की वेबसाइट पर फेक प्रोफाइल बनाते हैं, मैच करते हैं, चैट करते हैं और फिर भरोसे में लेकर अपराध को अंजाम देते हैं। इसमें साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इसलिए ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए रिश्ते बनाने से बचें। साइबर क्राइम बिना इंटरनेट के भी हो सकता है। अगर कोई आप से नॉर्मल कॉल पर भी पैसे से संबंधित अहम जानकारी लेकर फ्रॉड करता है तो उसे भी साइबर क्राइम ही माना जाता है। ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड ताले की चाबी की तरह है, इसलिए इसे किसी से शेयर नहीं करें।
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