शहर के डीजल ऑटो चालक चंडीगढ़ प्रशासन के उस फैसले के विरोध में खुलकर उतर आए हैं, जिसमें डीजल ऑटो को एक नवंबर से शहर में नहीं चलने देने का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को ऑटो रिक्शा यूनियन की एक आपात मीटिंग हुई।
मीटिंग में तय किया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने जल्दी फैसला नहीं बदला, तो ऑटो चालक हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं, ऑटो चालक मामले को अदालत में लेकर जाएंगे।
इसके अलावा डीजल से चलने वाले बड़े वाहनों का भी चंडीगढ़ से लगती सीमा पर घेराव करेंगे। उन्हें चंडीगढ़ में घुसने नहीं देंगे। ऐसे में चंडीगढ़ में खाने-पीने से लेकर हर चीज की कमी पैदा हो सकती है।
यूनियन के महासचिव ओम प्रकाश ने बताया की मौजूदा समय में चंडीगढ़ के आसपास से लगते क्षेत्र में आठ हजार ऑटो चलते हैं। ऑटो से रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं। उन्होंने बताया की एक ऑटो रिक्शा औसतन दिनभर में तीन लीटर के डीजल की खपत करता है, जो प्रदूषण के नाम पर नाममात्र है।
यूनियन नेता ने बताया कि समस्त सरकारी वाहन और चंडीगढ़ में पहुंचने वाली हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रदेशों से आने वाली बसों और मालवाहक वाहन प्रतिदिन करीब 80 लीटर से अधिक डीजल की खपत करते हैं। ऐसी अवस्था में केवल तीन पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाना पूरी तरह नाजायज है।