पितर तर्पण और पिंड दान के लिए 12 अक्तूबर का दिन शुभ है। क्योंकि इस दिन सोमवती अमावस्या पड़ रही है। यह शुभ योग 25 साल बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग सन 1990 में बना था।
विद्वानों की मानें तो श्राद्ध पक्ष में सोमवती अमावस्या का आना काफी महत्व रखता है। भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि सोमवती अमावस्या की मान्यता है कि इस दिन तिल के बराबर भी पितरों का तर्पण या श्राद्ध करने से परिवार को सुख समृद्धि और शांति मिलती है।
उन्होंने बताया भारत में तीन स्थान हैं हरियाणा के पांडू पिंडारा, उत्तर प्रदेश के कपाल मोचन और बिहार में गया, जहां पितरों का श्राद्ध किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन तीन स्थानों में यदि सोमवती अमावस्या को पिंडदान एवं तर्पण किया जाए तो पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देवालय पूजक परिषद के कैशियर लाल बहादुर दुबे के अनुसार धर्म शास्त्र कहते हैं कि पितरों को पिंडदान करने वाला गृहस्थ दीर्घायु, यश को प्राप्त करने वाला होता है। पितरों की कृपा से सब प्रकार की समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पितृपक्ष में पितरों को आस रहती है कि हमारे पुत्र पौत्र पिंड दान करके हमें संतुष्ट कर देंगे। इसी आस से पितृलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं। मृत्यु तिथि के दिन किए श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहा जाता है।
जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र के अनुसार जिसे किसी की मृत्यु की तिथि का ज्ञान न हो उसका श्राद्ध अमावस्या को करनी चाहिए।