तमाम कोशिशों के बावजूद लंदन के बोनहम्स नीलामी घर में चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचरों की नीलामी को नहीं रोका जा सका। लंदन में भारतीय उच्चायोग और पुलिस की दखल के बावजूद चंडीगढ़ के 10 हेरिटेज फर्नीचरों को 2.11 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इस नीलामी में चंडीगढ़ असेंबली के लिए ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किया गया कमेटी टेबल सबसे ऊंची बोली पर करीब 71.57 लाख रुपये में बिका।
14 अक्तूबर को हुई इस नीलामी को रोकने के लिए हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य और वकील अजय जग्गा ने काफी प्रयास किए। लंदन में भारतीय उच्चायोग ने भी काफी कोशिशें कीं सफलता हाथ नहीं लगी। हालांकि स्थानीय पुलिस मामले की जांच में लगी हुई है। अजय जग्गा ने इस नीलामी की जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर, लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग, चंडीगढ़ प्रशासन समेत अन्य को दी थी।
उन्होंने कहा था कि यह गैरकानूनी है, क्योंकि शहर की विरासत को विदेश में ले जाकर बेचा जा रहा है। उन्होंने सभी से इस नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी। जग्गा की शिकायत पर भारतीय उच्चायोग के प्रथम सचिव (ट्रेड) राहुल नागरे तुरंत सक्रिय हुए और इस नीलामी से जुड़ी सभी जानकारियां मांगी। साथ ही जल्द कार्रवाई का भरोसा भी दिया। इसके बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने स्थानीय पुलिस को जांच का जिम्मा सौंपा।
जग्गा ने कहा, निलामी घर से मांगे जाएं फर्नीचर खरीदने के दस्तावेज
जग्गा ने बताया कि जब लंदन पुलिस ने नीलामी घर के अधिकारियों से पूछताछ की तो उन्होंने कि जो फर्नीचर नीलामी के लिए रखे गए हैं, वह वर्ष 2011 से पहले खरीदे गए थे। साथ ही इनकी तस्करी से साफ इनकार कर दिया। जग्गा की तरफ से कहा गया है कि पुलिस नीलामी घर से सभी फर्नीचरों की खरीदारी के दस्तावेज मांगे ताकि सच्चाई सामने आए।
जग्गा ने 9 जुलाई 2018 को तुगलकाबाद से ब्राजील भेजे जा रहे हेरिटेज फर्नीचर की तस्करी की भी जानकारी भारतीय उच्चायोग को दी थी। वहीं, प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी जग्गा को हर तरह की सहायता देने की बात कही है। हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।