चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में तैनात 87 काउंसलर्स को उनकी दो महीने की पगार नहीं मिली है, जिससे उनका घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। एक बार फिर ठेकेदार की धोखाधड़ी की वजह से शिक्षा विभाग ने उनका वेतन रोक दिया है।ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को स्कूल शिक्षा निदेशक के समक्ष काउंसलर्स की समस्याओं को रखा। प्रतिनिधिमंडल में मौजूद काउंसलर्स ने बताया उनमें से कुछ दंपति जोड़े काउंसलर्स के पद पर तैनात हैं। ऐसे में दोनों की ही पगार नहीं आई है। उन्हें अपने बच्चों की फीस, घर का किराया, ईएमआई आदि भरनी है पर पगार कब मिलेगी इसका कोई अंदाजा नहीं। विभाग ठेकेदार पर कार्रवाई कर रहा है।
पहले की गलतियों से नहीं ली सीख
इससे पहले भी एक अन्य ठेकेदार ने काउंसलर्स के पैसे हड़प लिए थे, जिसके पैसे उन्हें दो साल बाद इस सत्र में मिले हैं। काउंसलर्स ने बताया कि जब तक स्पिक (सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़) के पास उनका वेतन देने का कार्यभार था तब तक वेतन मिलने में कोई दिक्कत नहीं आई थी पर जब से ठेकेदारों को यह काम सौंपा गया है, उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के समक्ष कमेटी ने रखीं यह मांगें
कमेटी की मांग है कि छुट्टियों के समय काउंसलर्स को काम पर रखा जाए और उन्हें वेतन दिया जाए। प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को समाप्त किया जाए, शिक्षकों के लिए सुरक्षा नीति और एसएसए, गेस्ट फैकल्टी को छठे वेतन आयोग का लाभ मिले। स्कूल शिक्षा निदेशक ने मांगों पर जल्द संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष सविंदर सिंह, संयोजक भाग सिंह कैरों, महासचिव रणवीर सिंह राणा, सचिव शिव मूरत और शमशेर सिंह शामिल रहे।