सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही इन दिनों अवैध निर्माण कर चंडीगढ़ की सूरत को बिगाड़ रहे हैं। पुलिस ने जगह-जगह अटल सहभागिता केंद्र बना दिए हैं, लेकिन इनके लिए इस्टेट ऑफिस की तरफ से न जमीन आवंटित की गई है, न टाउन प्लानिंग विभाग की मंजूरी मिली है और न ही आर्किटेक्ट विभाग ने डिजाइन तैयार किया है। फिर भी पुलिस ने अपना दबदबा दिखा शहर में कई जगह सड़क किनारे ऐसे पक्के केंद्रों का निर्माण कर दिया है।
चंडीगढ़ देश का पहला नियोजित शहर है। निर्माण से पहले प्रशासन के कई विभागों से इजाजत लेनी पड़ती है, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस विभाग ने सभी नियमों को नजरअंदाज कर अटल सहभागिता केंद्र बनाए हैं। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि सभी केंद्र अस्थायी तौर पर बनाए गए हैं। हालांकि सेक्टर-10 के पेट्रोल पंप के पास बने अटल सहभागिता केंद्र की पड़ताल की गई तो सामने आया कि यह सीमेंट व ईंट से बना पक्का निर्माण है। जो दो कमरों के बराबर है।
पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को भी टाइल्स लगाकर संरक्षित किया है। यूटी प्रशासन, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और इस्टेट ऑफिस का इंफोर्समेंट विंग शहर में एक फीट के अवैध निर्माण को भी रोजाना तोड़ रहा है। नया अवैध निर्माण करने वाले लोगों को लगातार नोटिस भेजा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी महकमा ही शहर में पब्लिक जमीन पर बिना किसी इजाजत के निर्माण कर रहे हैं और किसी विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।