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Agro Tech Expo: ज्यादा जमीन पर खेती की लागत कम करेगा ड्रोन, कई दिनों का काम घंटों में होगा

Sat, 05 Nov 2022 03:24 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

ड्रोन को लेकर बेंगलुरु से चंडीगढ़ पहुंचे आदित्य कुलकर्णी ने बताया कि बड़ी जमीनों पर व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि ड्रोन किसी वरदान से कम नहीं हैं, क्योंकि जो काम कई लोग मिलकर भी कई दिन में करते हैं। ड्रोन की मदद से वह कुछ घंटों में ही हो जाएगा।
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एग्राे टेक एक्सपो में कृषि के लिए आए ड्रोन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बड़ी जमीन पर खेती करने वाले किसानों को खेत की मैपिंग, कीड़े, बीमारियां, खरपतवार और जानवरों की निगरानी करने के लिए कई लोगों की जरूरत पड़ती है। इसमें कई दिन लग जाते हैं और काफी पैसा भी खर्च करना पड़ता है, लेकिन ड्रोन तकनीक से अब ये काम कुछ घंटों में हो जा रहा है। सेक्टर-17 के परेड ग्राउंड में लगे एग्रो टेक एक्सपो में एस्ट्रिया एयरोस्पेस ने कृषि के लिए खास दो ड्रोन ए200 और ए200-एक्सटी पेश किया है।

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ड्रोन की खासियत है कि ये खेत की मैपिंग, कीड़े, बीमारियां, खरपतवार और जानवरों की निगरानी तो करते ही हैं। ए200-एक्सटी में मौजूद सेंसर फसल में बढ़ते कीड़े और बीमारियों के जोखिम या दूसरी समस्याओं के प्रति भी किसानों को सचेत कर देते हैं। साथ ही खेत के उस एरिया की भी पहचान कर लेते हैं, जहां फसल को नुकसान हो रहा होता है। 

ड्रोन को लेकर बेंगलुरु से चंडीगढ़ पहुंचे आदित्य कुलकर्णी ने बताया कि बड़ी जमीनों पर व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि ड्रोन किसी वरदान से कम नहीं हैं, क्योंकि जो काम कई लोग मिलकर भी कई दिन में करते हैं। ड्रोन की मदद से वह कुछ घंटों में ही हो जाएगा। बताया कि कंपनी ड्रोन को बेचती भी है और सर्विस भी मुहैया कराती है। कई राज्यों में किसानों को प्रति स्क्वायर किमी के अनुसार भी सेवा दी जा रही है, जिसकी शुरुआत 2500 रुपये से होती है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा व यूपी में किसान तेजी से नई तकनीकों को अपना रहे हैं।
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ये है ड्रोन की खासियत
ए 200 -
ये 2डी सर्वे के लिए है, जिसमें 24.1 एमपी का आरजीबी इमेज कैमरा लगा हुआ है। कृषि भूमि की बाउंड्री की मैपिंग, फसल की सेहत और उसके ग्रोथ की भी जानकारी देता है। इसके अलावा ऊंचाई पर मोबाइल टावर के इंस्पेक्शन, लैंड सर्वे और माइनिंग की पहचान में भी इसका इस्तेमाल होता है। इसमें जीपीएस भी लगा होता है। स्पीड 36 किमी प्रति घंटा और रेंज करीब दो किमी है। 30 किमी की रफ्तार से चल रही हवा में भी ये 35 मिनट तक अच्छे से काम करता है। इसकी कीमत करीब 8.5 लाख रुपये है।

ए 200 एक्सटी - इसमें एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग होती है और 10-एक्स तक जूम की सुविधा है। रात के समय निगरानी के लिए इंफ्रारेड कैमरा भी लगा हुआ है। ड्रोन का इस्तेमाल कृषि के अलावा मिलिट्री, सिक्योरिटी, लॉ इन्फोर्समेंट और इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी के लिए भी किया जा सकता है। ड्रोन में जीपीएस के साथ इनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन लिंक है। इसके अनुसार जो भी डाटा रिकॉर्ड होगा, उसे चोरी नहीं किया जा सकता है। स्पीड 40 किमी प्रति घंटा और रेंज करीब चार किमी है। 30 किमी की रफ्तार से चल रही हवा में ये 40 मिनट तक अच्छे से काम करता है। इसकी कीमत करीब 14 लाख रुपये है।

कृषि में ड्रोन को सरकार भी दे रही है बढ़ावा
कृषि में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) योजना शुरू की है। इसके तहत ड्रोन के इस्तेमाल के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ड्रोन खरीदने पर 100 फीसदी या दस लाख रुपये तक अनुदान देने की परिकल्पना की गई। किसान उत्पादक संगठनों को ड्रोन खरीदने के लिए 75 फीसदी तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा प्रदर्शन के लिए ड्रोन किराये पर लेने वाले एजेंसियों को 6,000 रुपये हर बार आकस्मिक खर्च के तौर पर भी दिए जाते हैं।

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