चंडीगढ़। संविधान दिवस के मौके पर आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) ने पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट और सिंडिकेट में आरक्षण लागू न होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एएसए ने कहा कि यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इन संस्थाओं में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और महिलाओं के लिए आज तक आरक्षण शून्य है जबकि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4) और 16(4) सामाजिक न्याय को अनिवार्य करते हैं। एएसए ने चेतावनी दी कि यदि सरकार या प्रशासन बिना आरक्षण के चुनाव कराने की कोशिश करता है तो कैंपस और क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने याद दिलाया कि यूजीसी की 2006 की गाइडलाइंस और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के 2009 के आदेश में भी आरक्षण लागू करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था लेकिन पीयू प्रशासन 16 साल से इन निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देशभर में यूनिवर्सिटियों की स्वायत्ता कमजोर कर रही है और आरक्षण व्यवस्था पीछे धकेली जा रही है। साथ ही एएसए ने पंजाब सरकार को भी कटघरे में करते हुए कहा कि पीयू में आरक्षण लागू करवाने पर चुप्पी साधी हुई है। एएसए ने कहा कि हजारों एससी एसटी ओबीसी छात्रों और कर्मचारियों की आवाज को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना संविधान और सामाजिक न्याय दोनों के खिलाफ है। संगठन ने मांग की कि सीनेट सिंडिकेट चुनावों का शेड्यूल तत्काल जारी किया जाए और आरक्षण नीति पूरी तरह लागू की जाए।