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आशुतोष महाराज समाधि मामला: कथित पुत्र ने रखीं दलीलें, मामले में फैसला सुरक्षित

Wed, 10 May 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आशुतोष महाराज - फोटो : File Photo
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि व उनके शरीर को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। मंगलवार को पंजाब सरकार, संस्थान और महाराज के कथित पुत्र ने अपनी दलीलें रखीं।
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पंजाब सरकार की दलीलें
पंजाब के एजी अतुल नंदा ने कहा कि धर्म का मामला संविधान के आर्टिकल 25 के अधीन आता है। जब तक पब्लिक ऑर्डर, हेल्थ व मॉरेलिटी प्रभावित न हो नागरिक को धर्म के अनुसरण की स्वतंत्रता रहती है। यह संविधान में एक लकीर है, जो इस मामले में पार नहीं हुई है। इस आर्टिकल से जुड़ी जजमेंट कोर्ट में सौंपते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए।

आशुतोष महाराज केशरीर को लेकर सुनवाई करना हाईकोर्ट की जुरिडिक्शन में नहीं आता। जस्टिस महेश ग्रोवर पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यह खुद के बनाए नियम हैं। यह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है कि वह कौन सा मामला कहां तक देखे। यहां मामला कोर्ट में आया है और अब कोर्ट की जिम्मेदारी बनती है कि वह हर कानूनी सवाल का जवाब अपने फैसले में दे।
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महाराज के कथित पुत्र की दलील

आशुतोष महाराज - फोटो : file photo
महाराज के कथित पुत्र की दलील
पंजाब सरकार के बाद कथित पुत्र दलीप कुमार झा ने अपनी दलीलें रखीं। हाईकोर्ट ने कहा कि सबसे पहले याचिका किस आधार पर दाखिल की गई यह बताया जाए। झा के वकील एसपी सोई ने कहा कि दलीप कुमार झा के पास ऐसे पत्र मौजूद हैं, जिसमें आशुतोष महाराज ने उन्हें व उनकी मां को संबोधित किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि महापुरुष अक्सर लोगों को बेटा कह कर संबोधित करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे उनके बायोलॉजिकल पिता हैं। आशुातोष महाराज का विवाह करवाने वाले पंडित का हलफनामा दिखाया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि रोजाना रनवे कपल को ऐसे प्रमाण पत्र जारी होते हैं, हमें पता है कि कितने असली होते हैं और कितने नकली। झा के वकील ने कहा कि डीएनए टेस्ट करवा कर हाईकोर्ट दूध का दूध और पानी का पानी कर दे। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका रिट पटीशन है और इसमें डीएनए जांच के आदेश दिए गए हों ऐसा कोई कानून दिखाओ। याची ने कहा कि उसकेपास ऐसा कानून मौजूद नहीं है, लेकिन यह कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वह इसके आदेश दे सकता है।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का पक्ष
संस्थान की ओर से मौजूद काउंसिल ने कहा कि इस मामले में याचिका दाखिल करने वाले याची के अधिकार पर ही स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में इस याचिका को खारिज किया जाना चाहिए। इसके साथ ही संस्थान की ओर से लिखित में अपना पक्ष भी सौंप दिया गया।
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अर्जी दाखिल हो तो करवा लेते हैं शरीर का निरीक्षण

Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आज विभिन्न योगी मेडिटेशन करते हैं और उनके पास मेडिटेशन सीखने के लिए लोग आते हैं। वे अपने पास आने वालों को इसकी शिक्षा देते हैं। आशुतोष महाराज के मामले में ऐसी कोई दलील अभी तक नहीं दी गई है कि किसी पूजा, अर्चना या साधना की ऐसी कौन सी अवस्था है, जहां जाकर समाधि के इस स्तर को पाया जा सके।

इस मामले में किसी और शिष्य को ऐसे समाधि के ज्ञान की बात भी सामने नहीं आई है। जहां तक बात रही विश्वास और उसके रक्षा की तो पहले विश्वास को स्थापित करना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि कोई सती प्रथा में विश्वास रखे तो उसे तो मान्यता नहीं दे सकते। साथ ही मान्यता है कि श्री गुरु गोविंद सिंह जी अर्जुन के अवतार थे। अब कुछ लोग यह मानते हैं और कुछ नहीं।

अर्जी दाखिल हो तो करवा लेते हैं शरीर का निरीक्षण
मामले की सुनवाई के दौरान कथित पुत्र ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों में यह खबर आई है कि आशुतोष महाराज का शरीर खराब हो रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की बातें बिना साक्ष्यों के नहीं मानी जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रकार का शक है तो बताया जाए, हम डाक्टरों की टीम नियुक्त कर बॉडी का निरीक्षण करवा लेते हैं। याची ने हामी भरी तो हाईकोर्ट ने कहा कि इसके लिए अर्जी दाखिल की जाए। अर्जी के साथ ही निरीक्षण के लिए आवश्यक फीस भी जमा करवाई जाए।

यह है मामला
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के शरीर की स्थिति से यह पूरा विवाद जुड़ा है। 2014 में उन्हें समाधि की अवस्था में करार देते हुए उनके शरीर को डीप फ्रिजर में रख दिया गया था। इसके बाद उनके समर्थकों का दावा था कि वे इस शरीर में पुन: प्रवेश करेंगे, उनके शरीर को संरक्षित करना जरूरी है। इसके बाद से ही यह मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। कभी महाराज के अपहरण का आरोप लगाया गया तो कभी उनकी हत्या की बात कहते हुए याचिकाएं दाखिल की गईं।

आखिरकार एक कथित पुत्र सामने आया जिसने आशुतोष महाराज को पिता बता शव के अंतिम संस्कार पर अपना हक बताते हुए उसे सौंपने की अपील की। इस मामले में सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को सौंप दी थी। इस फैसले को संस्थान, कथित पुत्र, महाराज समर्थकों और पंजाब सरकार ने डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी है।
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