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आशुतोष महाराज: सबकी नजर कोर्ट की ओर

Tue, 11 Feb 2014 05:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा करने वाले मधुबनी के दिलीप झा अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उनकी मांग है कि क्लीनिकली डेड उनके पिता का शरीर अंतिम क्रिया के लिए उन्हें दिया जाए। दिलीप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए संबंधित दस्तावेज हस्ताक्षर करके चंडीगढ़ के एडवोकेट को भेजे हैं। अगले कुछ दिनों में हाईकोर्ट में उनकी तरफ से याचिका दायर की जा सकती है। बिहार के मधुबनी में अपनी गांव से फोन पर दिलीप झा ने अमर उजाला को यह जानकारी दी।
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बिहार के सीएम नीतीश कुमार को दिया ब्योरा

दिलीप झा ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी बिहार के सीएम नीतीश कुमार को भी दी गई है। दिलीप झा के साले मोहनानंद ने बिहार के मंत्री नीतीश मिश्रा के साथ विस्तार से बातचीत की और पूरे मामले का ब्योरा दिया। नीतीश मिश्रा ने इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी है। अब दिलीप झा के परिवार के सदस्य जनता दल यूनाइटेड के नेताओं से मदद मिल की उम्मीद कर रहे हैं।

धार्मिक रीति रिवाज से करना चाहते हैं संस्कार

दिलीप झा ने बताया कि उन्हें अपने पिता आशुतोष महाराज उर्फ महेश झा के संस्कार धार्मिक रीति रिवाज से पूरे करने हैं। इसके लिए वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने संबंधित  दस्तावेज अपने वकील को चंडीगढ़ भेज दिए हैं। अगर पंजाब आने की जरूरत हुई तो वे जरूर आएंगे। उन्होंने पहले दस्तावेज भेजे थे, उनमें कुछ खामियां थीं। अब उन्हें दूर कर दोबारा भेजा गया है। दिलीप झा ने यह भी कहा कि बिहार में भी दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के काफी अनुयायी हैं, जो अब धीरे धीरे खड़े हो रहे हैं। वे बिना किसी विवाद के चलना चाहते हैं।

पीजीआई में देह की जांच की मांग

उध्‍ार दिव्य ज्योति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले आशुतोष महाराज के कथित ड्राइवर पूर्ण सिंह ने उनकी देह की मेडिकल जांच चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में करवाने का आग्रह किया है। अपील में उन्होंने मीडिया के सामने देह की मेडिकल जांच करवाने का आग्रह किया है। हाईकोर्ट इस अपील पर मंगलवार को फैसला ले सकता है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने याचिका की मैनटेनिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए याची से 11 फरवरी को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे।

आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दिया था

इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने भी हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दिया था। पंजाब सरकार की ओर से नकोदर के डीएसपी एचपीएस परमार ने पिछले बुधवार को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। उधर, संस्थान की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आशुतोष महाराज लंबी समाधि की अवस्था में है। संस्थान के मुताबिक आशुतोष महाराज को बंधक बनाकर नहीं रखा गया है, न ही कोई प्रॉपर्टी विवाद चल रहा है।

अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के निर्देश

संस्थान ने याची की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कानूनी रूप से याचिका सही नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएमएस बेदी ने याची के वकील से याचिका के औचित्य पर सवाल उठाया। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत संस्थान के पास स्वतंत्रता का अधिकार है। इस पर याची के वकील कोई संतोषजनक जवाब हाईकोर्ट में नहीं दे पाए तो हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
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समाधि लेट कर नहीं बैठकर ली जाती है

उधर महाराज गहन समाधि में हैं या ब्रह्मलीन हो चुके हैं, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है वहीं साइंस व परम विज्ञान के बीच भी बहस छिड़ी हुई है। इसी बहस के बीच सोमवार को संत बाबा निर्मल दास जी जोड़े वालों ने अमर उजाला से कहा कि समाधि लेट कर नहीं बैठकर ली जाती है। उन्होंने कहा कि समाधि की जानकारी उस व्यक्ति को होती है जो ब्रह्मज्ञानी होता है। बाबा निर्मल दास जी जालंधर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि संत जब समाधि में जाते हैं तो अपने नजदीकी को पूरा ज्ञान देते हैं और उदय होने का वक्त भी बताकर जाते हैं।
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