दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के प्रमुख आशुतोष महाराज के केस में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की।
जस्टिस एसके मित्तल की डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बाबाओं की मौत के बाद सम्मानजनक संस्कार हुआ तो इस मामले में शव को पिछले डेढ़ साल से फ्रिज में क्यों रखा गया है।
श्रद्धालुओं के आशुतोष महाराज के समाधि में होने की मान्यता पर बेंच ने कहा कि पंजाब सरकार क्लीनिकली डेड करार दे चुकी है। यदि शव रखने की इजाजत दी जाती है तो हर कोई घर में शव रखने लगेगा। यदि ऐसा हुआ तो क्या श्मशानघाट पर ताले जड़ दिए जाएंगे।
पंजाब के सॉलिसिटर जनरज पहुंचे हाईकोर्ट
पंजाब सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार विशेष तौर पर दिल्ली से बहस के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। उन्होंने कहा कि याचिका में कहीं भी संस्कार करने की मांग नहीं थी, ऐसे में पंजाब सरकार को संस्कार कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
इस पर बेंच ने कहा कि राज्य सरकार की भी जिम्मेवारी बनती है। संस्थान के वकील ने फिर से आशुतोष महाराज के समाधि में होने का दावा किया, लेकिन हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या भारत में ऐसा कोई उदाहरण है, जहां शव को लंबे समय तक फ्रिज में रखा गया हो। बेंच ने कहा कि शव को लंबे समय तक रखना शव का अपमान है।
बेंच ने यह भी कहा कि यह मामला अब तक आपसी सहमति से सुलझा लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं होने पर सरकार को जिम्मेवारी निभानी चाहिए थी। फिलहाल, बेंच ने सुनवाई 18 अगस्त तक स्थगित कर दी है।
दिलीप की अर्जी पर नहीं हो सकी सुनवाई
आशुतोष महाराज के बेटा होने का दावा करने वाले दिलीप झा की अर्जियों पर भी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। दिलीप झा ने कई सबूत दिए हैं कि आशुतोष महाराज उनके पिता थे और शव उसे सौंपा जाना चाहिए ताकि हिंदू रीति रिवाज से वह दाह संस्कार कर सके। इस अर्जी पर अब अगली सुनवाई को बहस होने की उम्मीद है।
एकल बेंच ने पंजाब सरकार को आशुतोष महाराज का दाह संस्कार करने का निर्देश दिया था। इस फैसले को पंजाब सरकार, दिलीप झा और संस्थान ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।
इस मामले में सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक आशुतोष महाराज को 28-29 जनवरी 2014 की रात को अचानक सांस में दिक्कत हुई और प्रारंभिक जांच के बाद सरकारी डाक्टरों ने उस रात कुछ घंटों बाद क्लीनिकली डेड करार दे दिया था। तब से लेकर अब तक क्लीनिकली डेड आशुतोष महाराज को फ्रिज में रखा गया है।