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जानिए, आखिर क्या है आशुतोष महाराज का सच

Tue, 02 Dec 2014 05:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल (जालंधर) के प्रमुख महाराज आशुतोष का अतीत उनके क्लीनिकल डेड होने के बाद ही उजागर हुआ। उनका बेटा होने का दावा करने वाले दिलीप झा के अनुसार महाराज आशुतोष महेश झा हैं और वे वेदप्रवक्तानंद नाम से भी जाने जाते थे।
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वहीं संस्थान आशुतोष महाराज के अतीत पर चुप्पी साधे हुए है। दिलीप की मानें तो महाराज आशुतोष मूल रूप से दरभंगा के लखनौर गांव के रहने वाले थे। अमर उजाला के पास महेश झा के पासपोर्ट की कॉपी है, जिसका नंबर जे-691673 है। यह पासपोर्ट दिल्ली से जारी हुआ है।

इसमें महेश झा को प्रचारक बताया गया है। साथ ही लिखा है कि महेश झा वेदप्रवक्ता नंद के नाम से भी जाने जाते हैं। पासपोर्ट के मुताबिक उनका जन्म 6 अगस्त 1946 को हुआ है। इसमें महेश झा का पता 2-12 पंजाबी बाग न्यू दिल्ली दर्ज है, इसमें पिता का नाम देव आनंद बताया गया है।
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महेश झा किसी समय में सतपाल महाराज के पास पंजाबी बाग डेरे में उनके शिष्य के तौर पर आश्रम में ज्ञान लेते थे। वहीं वेदप्रवक्तानंद ने दिल्ली में सतपाल महाराज के आश्रम में जब सेवा की, तो उन्होंने अपना पूरा विवरण दिया।

अंतिम संस्कार होने का रास्ता साफ

महेश झा के अनुसार उन्होंने सीएम कॉलेज दरभंगा से मास्टर डिग्री की है। साथ ही भाइयों की संख्या छह व बहनों की संख्या तीन लिखी हुई है, जो महेश झा के परिवार के सदस्यों की है। वहीं दिव्य ज्योति जागृति संस्थान महाराज आशुतोष के अतीत में जाने से साफ मना करता रहा है।

संस्थान के मुताबिक संत का अतीत खत्म हो जाता है। लखनौर में रहने वाला दिलीप खुद को महेश झा का बेटा तो बताता है, लेकिन संस्थान यह स्पष्ट नहीं करता कि महेश झा ही आशुतोष महाराज हैं।

अंतिम संस्कार के आदेश
इस साल 29 जनवरी को दस माह से क्लीनिकली डेड घोषित होने के बाद आखिरकार अब पंजाब के दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज के शव का अंतिम संस्कार होने का रास्ता साफ हो गया। सोमवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 15 दिन में आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार करने के आदेश दे दिए।

दिलीप झा और पूर्ण सिंह की मांग खारिज

जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने आशुतोष महाराज का शव दर्शन के लिए रखे जाने को भी कहा है। इस दौरान कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य के डीजीपी की होगी। शव के अंतिम संस्कार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया है। यह कमेटी ही तय करेगी कि अंतिम संस्कार कैसे, कहां और किसके हाथों कराया जाए।

फैसला सुनाते हुए एकल बेंच ने कहा कि समाधि का तर्क अवैज्ञानिक है। डॉक्टर भी आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दे चुके हैं, लिहाजा शव का निपटान जरूरी है और सरकार 15 दिन में शव का अंतिम संस्कार करे।

बेंच ने इसके प्रबंधों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित करते हुए कमेटी में स्वास्थ्य विभाग, गृह विभाग के उच्चाधिकारियों के अलावा जालंधर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया है। जस्टिस एमएमएस बेदी ने आशुतोष महाराज का शव सौंपे जाने की दिलीप झा और ड्राइवर पूर्ण सिंह की मांग को भी ठुकरा दिया।

कोर्ट में चल रहा था केस

इस साल जनवरी में आशुतोष महाराज के कथित समाधि में चले जाने के समाचार के कुछ दिन बाद ही उनके ड्राइवर होने का दावा कर रहे पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आशुतोष महाराज की हत्या की आशंका जताते हुए उनके शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की।

इस पर कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी स्थिति साफ करने को कहा था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं। यह मामला अभी हाईकोर्ट में चल ही रहा था कि दिलीप झा नामक युवक ने खुद को आशुतोष महाराज का पुत्र बताते हुए एडवोकेट एसपी सोही के माध्यम से याचिका दायर कर शव सौंपे जाने की मांग की।

दिलीप ने मांग की शव का पोस्टमार्टम कराया जाए और अंतिम संस्कार बिहार के मधुबनी स्थित आशुतोष महाराज के पैतृक गांव लखनौर में कराया जाए। इस पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने भी अदालत में दावा किया कि आशुतोष महाराज गहन समाधि में हैं और समाधि से लौट सकते हैं। पक्ष में आध्यात्मिक दलीलें भी दी थीं। दिलीप पर आशुतोष का बेटा नहीं होने का आरोप भी लगाया गया।

बेंच ने संस्थान से यह भी पूछा था कि आखिर शव को कितनी देर तक संभाला जा सकता है। संस्थान ने कहा था कि गोवा की चर्च में दो सौ साल पुराना शव अभी तक पड़ा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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दोपहर बाद एकल बेंच ने फैसला सुनाया

इसके बाद दिलीप ने अर्जी दाखिल कर अपना डीएनए टेस्ट आशुतोष महाराज के शव से कराने की मांग रखी जिस पर सोमवार सुबह कोर्ट में विचार के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया लेकिन दोपहर बाद एकल बेंच ने फैसला सुनाते हुए आशुतोष महाराज के शव के अंतिम संस्कार का निर्देश दिया।

फैसले में बेंच ने यह भी कहा है कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए पंजाब विधानसभा को कानून बनाने पर विचार करना चाहिए।

आशुतोष महाराज को डॉक्टरों ने 29 जनवरी, 2014 को क्लीनिकली डेड करार दे दिया था। तब से उनका शव नूरमहल संस्थान में ही रखा है। संस्थान के अनुयायी आशुतोष महाराज को समाधि में होने का दावा करते रहे।

दिलीप झा फैसले को देंगे चुनौती
फैसला सुनाए जाने पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के वकील आरएस राय ने बेंच से समयावधि बढ़ाने का आग्रह किया वह डिवीजन बेंच में फैसले को चुनौती दे सकें। बेंच ने कहा कि इसके लिए अलग से अर्जी दायर की जा सकती है। उधर, आशुतोष महाराज के पुत्र होने का दावा कर रहे दिलीप झा के वकील ने कहा कि वह शव हासिल करने के लिए अपील करेंगे।
 
मामले पर नजर रखे है सरकार
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पंजाब सरकार स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं। मुख्य सचिव सर्वेश कौशल और डीजीपी सुमेध सिंह सैनी खुद इस पूरे मामले की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
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