दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर प्रमुख आशुतोष महाराज मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
जस्टिस के.कनन की बेंच ने कहा है कि जब आशुतोष महाराज की मौत संदिग्ध हालात में हुई है तो अब तक शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया।
इस केस में पंजाब सरकार का रवैया देश को शर्मसार कर रहा है। अब तक शव का पोस्टमार्टम हो जाना चाहिए था, लेकिन कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार की आनाकानी सही नहीं है। हाईकोर्ट ने मामले में संस्थान को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब तलब किया है।
बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा...
बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि आशुतोष महाराज की मौत पर संदेह जताया जा रहा है। इस लिहाज से इसे संदिग्ध परिस्थितियों में मौत माना जाएगा।
अब तक मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम हो जाना चाहिए लेकिन यह अब तक नहीं हो सका। राज्य सरकार कार्रवाई करने में आनाकानी कर रही है, जो सही नहीं है। बेंच ने दो सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान मामले का अंतिम निपटारा करने का संकेत दिया है।
कोर्ट की टिप्पणी
1. केस में पंजाब सरकार का रवैया देश को शर्मसार कर रहा है
2. कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार की आनाकानी सही नहीं है
पूर्ण सिंह और दिलीप झा ने दायर की याचिका
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से पहले पंजाब सरकार ने कहा कि ड्राइवर होने का दावा कर रहा पूर्ण सिंह शोहरत के लिए झूठे आरोप लगा रहा है। पूर्ण सिंह ने डेरे की संपत्ति हड़पने के लिए आशुतोष महाराज की हत्या की आशंका जताई थी।
केस में दिलीप झा ने याचिका दायर कर कहा था कि आशुतोष महाराज मधुबनी (बिहार) के गांव लखनौर के रहने वाले हैं। वहां के श्रद्धालु चाहते हैं कि शव का अंतिम संस्कार गांव में हो। शव पाने के लिए उन्होंने बिहार के गृह सचिव से गुहार लगाई थी, क्योंकि उन्हें पंजाब आने से डर लगता है। झा के अनुसार गृह सचिव ने पंजाब के गृह सचिव को शव बिहार पहुंचाने के लिए पत्र भेजा था। उनके क्षेत्र के सांसद ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज कर शव बिहार पहुंचाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दलील के साथ दिलीप झा ने शव प्राप्त करने और पोस्टमार्टम की मांग की थी।
समाधि और मौत के बीच उलझा मामला
आशुतोष महाराज का शव 28 जनवरी 2014 की रात से दिव्य ज्योति जागृति संस्थान जालंधर में पड़ा है। वहां शव को फ्रीजर में रखा गया है।
डॉक्टर, दिलीप झा, पूर्ण सिंह और यहां तक पंजाब सरकार भी मानती है कि आशुतोष महाराज की मौत हो चुकी है, लेकिन संस्थान के श्रद्धालुओं का कहना है कि महाराज समाधि में हैं और कभी भी लौट सकते हैं।