दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के प्रमुख आशुतोष महाराज का पोस्टमार्टम कराने और मौत का कारण पता लगाने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर बहस शुरू हो गई है।
बहस शुक्रवार को भी जारी रहेगी। वीरवार को आशुतोष महाराज के ड्राइवर पूर्ण सिंह के एडवोकेट आरएस बैंस ने जस्टिस एमएमएस बेदी की बेंच के समक्ष पैरवी की कि आशुतोष महाराज की अज्ञात परिस्थितियों में हुई मौत संबंधी कार्रवाई और मौत का कारण पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी है।
ड्राइवर पूर्ण सिंह ने दायर की है याचिका
बैंस ने कहा कि यह पता लगाना बहुत जरूरी है कि मौत आकस्मिक है या फिर यह हत्या का मामला है। दूसरी ओर, सरकारी वकील ने बेंच को बताया कि पूर्ण सिंह के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और वह झूठी शिकायतें देता रहता है। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इससे माहौल खराब हो सकता है।
संस्थान के अनुयायियों का मानना है कि 28 जनवरी की रात से महाराज समाधि में हैं, जबकि पंजाब सरकार मान चुकी है कि आशुतोष महाराज की मौत हो चुकी है।
ड्राइवर पूर्ण सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे आशंका है कि डेरे के कुछ पैरोकारों ने संपत्ति के लिए आशुतोष महाराज की हत्या की है।
28 जनवरी से आशुतोष महाराज समाधि में
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज 28 जनवरी 2014 से नूर महल स्थित डेरे में समाधि में हैं। मंगलवार 28 जनवरी 2014 की रात करीब साढ़े बारह बजे वे समाधिलीन हो गए थे। डेरे की तरफ से स्वामी विशालानंद व स्वामी विश्वानंद ने आशुतोष महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर को एक अफवाह बताया था।
इस मामले में खुद को महाराज का ड्राइवर बताने वाले पूरण सिंह और उनके बेटे दिलीप कुमार झा ने विभिन्न मुद्दों पर कई बार हाईकोर्ट की शरण ली है।
आशुतोष महाराज को बंधक बनाने का आरोप
समाधि में गए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के मामले में नूर महल निवासी पुरण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने आशुतोष महाराज को गैर कानूनी रूप से बंधक बनाकर रखा है।
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब व हरियाणा की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार और अन्य चार प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इस मामले में महाराज के कथित चालक पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया था कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने अभी तक पोस्टमार्टम की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इसके बाद कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।