इसी बैठक में विधानसभा चुनावों के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी। तंवर ने कहा कि बैठक में चुनाव प्रचार प्रबंधन के साथ-साथ प्रत्याशियों के चयन का फार्मूला भी तय करेंगे। जल्दी चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं से आवेदन मांगे जाएंगे। जिताऊ उम्मीदवारों का सर्वे भी कराया जाएगा। अब जिला और ब्लाक कार्यकारिणी का गठन नहीं होगा। जरूरत के हिसाब से चुनाव प्रबंधन कमेटियां बनाई जाएंगी।
इलेक्शन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट कमेटी बूथ स्तर तक बनेंगी। 8 जुलाई को पहली बैठक के बाद प्रदेश भर में कमेटियों के गठन का काम शुरू किया जाएगा। चुनाव प्रबंधन कमेटी में सात सब कमेटी बनाई जाएंगी।
जिनमें मेनीफेस्टो कमेटी, मीडिया कमेटी, फाइनेंस कमेटी, कैंडीडेट आईडेंटीफिकेशन कमेटी, कैंपेन कमेटी, आर्गेनाइजेशन कमेटी व पॉलिटिकल लीडर्स कमेटी होंगी। तंवर ने कहा कि फिलहाल नेता विपक्ष पद को लेकर पार्टी हाईकमान से किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है। अब अगले दो महीने तक कोई फैसला होने के आसार नहीं है।
दो बार की इस्तीफे की पेशकश, मिला काम करने का निर्देश
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अशोक तंवर ने अपने इस्तीफे पर भी पत्रकार वार्ता में खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एआईसीसी और राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष वह दो बार इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन उन्हें दोनों बार काम करने का निर्देश मिला।
लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी सामूहिक होनी चाहिए न सिर्फ एक व्यक्ति की। मैं अध्यक्ष पद पर हूं और हाईकमान के निर्देशों तक रहूंगा। वह तो पार्टी के लिए जान देने को भी तैयार हैं, इस्तीफा तो छोटी बात है।