हरियाणा के सूचना आयुक्तों और सेवा का अधिकार आयोग में हुई नियुक्तियों के मामले में प्रदेश सरकार के साथ-साथ अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
नए राज्यपाल ने इन नियुक्तियों पर सरकार से जवाब देने को कहा है। इस मामले में दिलचस्प यह है कि सरकार की तरफ से जवाब प्रशासनिक सुधार विभाग को ही तैयार करना होगा। यानी यह जिम्मेदारी सचिव प्रदीप कासनी को मिलेगी, जो पहले ही इन नियुक्तियों पर प्रक्रियागत आपत्ति उठा चुके हैं।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुश्किल से सरकार को उबारने का हल तलाशने की कवायद शुरू कर दी है। नियुक्तियों पर कासनी की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद इस मामले की फाइल मंगाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले तत्कालीन मुख्य सचिव एससी चौधरी अब रिटायर हो चुके हैं।
ऐसे में कासनी ही सूचना आयुक्तों और सेवा का अधिकार आयोग के सदस्यों की नियुक्तियों के मामले में दखल रखने वाले वरिष्ठतम अधिकारी हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अब सरकार को प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव का दरवाजा खटखटाना ही पड़ेगा।
इस मामले में तकनीकी आपत्तियों का जवाब प्रशासनिक सुधार विभाग ही दे सकता है। इसके अलावा चूंकि नियुक्तियों की फाइल इसी विभाग के जरिए आगे बढ़ी थी, इसीलिए किसी तरह की प्रक्रियागत कार्रवाई भी इसी विभाग के जरिए ही होगी। विपक्ष इन नियुक्तियों के अवैध होने का आरोप लगा रहा है, जिसके आधार पर एक अगस्त को हरियाणा के नए राज्यपाल ने सरकार से पूछा है कि मामले में 15 दिन के भीतर टिप्पणी की जाए।
हरियाणा के प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव प्रदीप कासनी ने इस मामले में यह कह कर आपत्ति उठाई थी कि आयोग के पदाधिकारियों के नाम राज्यपाल की अनुमति के बगैर जोड़े गए हैं। उन्होंने यह कहकर फाइल लौटा दी थी कि पहले यह मामला गवर्नर के नोटिस में लाया जाए।