हरियाणा परिवहन आयुक्त पद से ट्रांसफर कर पुरातत्व विभाग में भेजे गए आईएएस अशोक खेमका नई मुश्किल में फंस सकते हैं।
कैग की साल 2013-14 की रिपोर्ट में हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में गेल वेल्यूम शीट की खरीद में अनियमितता के खुलासे को आधार बनाकर आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोशन लाल ने प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस ढेसी को पत्र लिखा है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि खेमका की ओर से की गई शीट की खरीद की सीबीआई से जांच करवाई जाए। गेल वेल्यूम शीट की खरीद के समय अशोक खेमका वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक थे।
पिछली जांच में हुआ था धांधली का खुलासा
रोशन लाल ने अपने पत्र में कहा है कि गेल वेल्यूम शीट की खरीदारी में अनियमितता को लेकर प्रदेश की पिछली सरकार के कार्यकाल में भी जांच हुई थी। उसमें भी धांधली का खुलासा हुआ था।
उस समय सरकार ने मामले की सीबीआई जांच का फैसला लिया था, लेकिन तभी कैग की ओर से जांच शुरू कर दिए जाने पर फैसले को स्थगित कर दिया गया था।
रोशन लाल ने कहा है कि हुड्डा सरकार ने यह फैसला भी लिया था कि अगर कैग की रिपोर्ट में भी आरोप साबित हुए तो मामले की सीबीआई जांच कराई जाएगी।
रोशन लाल ने पत्र में कहा है कि उनकी रिपोर्ट में जो बातें सामने आई थीं, उनकी पुष्टि कैग की रिपोर्ट में हो गई है। उन्होंने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार सीबीआई से जांच की सिफारिश करे।
यह था गेल वैल्यूम शीट का मामला
पंचकूला निवासी रविंद्र कुमार ने साल 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि 2009 में हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में अनाज के गोदामों की छतों के लिए खरीदी गई गैल वेल्यूम शीटों की खरीदारी में धांधली हुई है। तब रोशन लाल कृषि विभाग के प्रधान सचिव थे।
हुड्डा सरकार ने रोशन लाल को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा। रोशन लाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गैल वेल्यूम शीट खरीद में अनियमितताएं हुईं और टेंडर में भी नियमों का उल्लंघन किया गया। रोशन लाल ने रिपोर्ट में मामले की विजिलेंस जांच करवाने की सिफारिश की थी।
खेमका ने फिर किया ट्वीट
हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका ने सोमवार को ट्वीट कर कहा है कि वे न तो किसी से समर्थन में हैं और न ही किसी के विरोध में काम कर रहे हैं। उनका प्रयास केवल ईमानदारी और बिना किसी भय के अपनी ड्यूटी निभाना है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि वे किसी के समर्थन पर ध्यान नहीं दे रहे।
परिवहन आयुक्त पद से ट्रांसफर कर पुरातत्व विभाग में भेजे गए खेमका बीते सप्ताह राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से मिलने के बाद से मौन थे। कई दिनों बाद उन्होंने ट्वीट कर अपने बारे में बहुत सधी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि परिवहन आयुक्त पद से तबादले पर उन्होंने ट्वीट किया था कि वे इससे बेहद आहत हैं।
बीते सप्ताह ही अशोक खेमका के तबादले के बाद प्रदेश की राजनीति में भी उन्हें लेकर सरगर्मियां बढ़ गई थीं। हुड्डा शासन के दौरान वाड्रा लैंड डील मामला उजागर कर सुर्खियों में आए खेमका के तबादले पर विपक्ष ने खट्टर सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। स्थिति यहां तक पहुंची कि मुख्यमंत्री खट्टर को आगे आकर सरकार के बचाव में बयान देना पड़ा था।