चंडीमंदिर के कमान हॉस्पिटल ने एक नायक की ब्रेन डेड बाडी से लीवर व दोनों किडनियां सुरक्षित निकाल कर तीस मिनट में दिल्ली पहुंचा कर इतिहास रच दिया। इन अंगों से नई दिल्ली आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल में तीन लोगों की जान बचाई गई।
चंडीमंदिर स्थित कमान हॉस्पिटल के चीफ ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलाजी एवं लीवर ट्रांसप्लांट के एचओडी कर्नल एके शर्मा ने बताया कि बुधवार को आपरेशन के तुरंत बाद डोनर के किडनी और लीवर को एयरफोर्स के विशेष एयरक्राफ्ट से रात आठ बजे दिल्ली के आर्मी हास्पिटल के लिए रवाना कर दिया गया।
मात्र 30 मिनट के भीतर विमान दिल्ली पहुंच गया। उसके बाद वहां प्राथमिकता के तौर पर ट्रांसप्लांट किया गया। डोनर से लीवर निकालने के बाद उसे 12 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट करना जरूरी होता है। यदि इसमें देरी हुई तो फिर लीवर को ट्रांसप्लांट करना मुश्किल हो जाता है।
कोमा में आए थे नायक नरेंद्र सिंह
वेस्टर्न कमान में तैनात नायक नरेंद्र सिंह 24 नवंबर को गंभीर हालत में कमान हास्पिटल के आईसीयू में एडमिट कराया गया था। वे डीप कोमा में थे। इंटरवेन्सिस्ट और न्यूरोफिजीशियन इंचार्ज की ओर से किए गए सभी टेस्ट के बाद सोल्जर को ब्रेन डेड घोषित किया गया।
26 नवंबर को सोल्जर के परिजनों से अनुमति मिलने के बाद ब्रेन डेड बाडी से लीवर, किडनी और क्रोनिया निकाल दिए गए। बताया गया कि जब फैमिली से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने देर किए बिना अंगदान करने के लिए हां कर दी।
चेन्नई में रोका गया था ट्रैफिक
इसी साल के जून महीने में चेन्नई में एक व्यक्ति की दिल की धड़कन शुरू करने के लिए ट्रैफिक को रोक दिया गया था। घटना के मुताबिक सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज के हृदय ने काम करना बंद कर दिया था। इस व्यक्ति की जान हार्ट ट्रांसप्लांट के जरिए ही बचाई जा सकती थी।
डाक्टरों ने तुरंत 12 किलोमीटर दूर एक प्राइवेट हास्पिटल से हार्ट मंगवाया। शाम का वक्त होने के कारण ट्रैफिक का दबाव ज्यादा था। डाक्टरों ने ट्रैफिक पुलिस से आग्रह किया कि हार्ट लेकर आ रही एंबुलेंस को न रोका जाए। पुलिस ने भी गंभीरता को समझा और ग्रीन कारिडोर बनाकर हार्ट को हास्पिटल में पहुंचा और चंद घंटों में ट्रांसप्लांट हो गया।