देश-विदेश तक चर्चा में आए दस वर्षीय मासूम से दुराचार और उसके बाद बच्ची को जन्म देने के मामले में मंगलवार को फैसला आ सकता है। सोमवार को बचाव और अभियोजन पक्ष में अंतिम बहस पूरी हो गई।
हालांकि अंतिम बहस में बचाव पक्ष की ओर से मामले में पीड़ित बच्ची के माता-पिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। साथ ही दोनों की मामले में जिम्मेदारी भी तय करने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने खासकर पिता की भूमिका और जिम्म्ेदारी पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट की विशेष देखरेख में चल रहे केस में सोमवार को अंतिम बहस के बाद अब मंगलवार को एडीजे पूनम आर जोशी फैसला सुना सकती हैं।
सोमवार को पहले आरोपी की ओर से बचाव पक्ष के वकील मंजीत सिंह ने 10 वर्षीय बच्ची से दुराचार और उसके गर्भवती बनने पर उसके अभिभावकों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केस के पहले दिन से ही पीड़िता का पिता सामने नहीं आया है। वह न तो पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गए और न ही अस्पताल में बेटी के उपचार के दौरान सामने आए। वह केस की एक भी सुनवाई के दौरान अदालत में भी नहीं आए। जि दिन उनकी बेटी और पत्नी की गवाही दर्ज हुई उस दिन भी वह कोर्ट में नहीं आए। बचाव पक्ष ने ऐसे गंभीर मुद्दे में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए अदालत से अपील की।