पीजीआई के फीस काउंटर नंबर 16 व 20 पर बैठे कर्मचारियों की लापरवाही से मरीजों के सामने नई परेशानी खड़ी हो रही है। डाक्टर जो टेस्ट लिखकर देते हैं, काउंटर में बैठे कर्मचारी उसे बदलकर दूसरे टेस्ट की फीस भर देते हैं। जो टेस्ट दस रुपये में होता था, उसकी जगह 25 रुपये ले लेते हैं, फीस रसीद पर टेस्ट भी बदल कर लिख दिए जाते हैं। जब मरीज सैंपल देने जाता है तो उसका सैंपल ले लिया जाता है, लेकिन आटोमैटिक मशीन उसे स्वीकार नहीं करती। क्योंकि मशीन वही टेस्ट स्वीकार करती है, जो फीस काउंटर से रसीद कट कर आती है।
हालांकि बाद में लैब टेक्नीशियन उसे मैनुअल कर देते हैं, लेकिन इस चक्कर में मरीज को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक तो मरीज को आनलाइन रिपोर्ट नहीं मिलती। जब वह अपनी सैंपल की रिपोर्ट लेने जाता है तो मरीज को दोबारा से बढ़ी फीस वापस लेने या फिर कम ली गई फीस को पूरी भरने के लिए भेज दिया जाता है।
यानी उसे फिर से लाइन में लगना पड़ता है। कई बार तो मरीज बढ़ी फीस वापस लेने तक नहीं जाते। जो रुपये ज्यादा आते हैं, उनका क्या होता है, किसी को पता नहीं। जांच में पता चला है कि रोजाना पांच से छह गलत टेस्ट भरे जाते हैं। यह गलतियां काउंटर नंबर 16 और 20 पर हो रही हैं। इस बारे में कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता।
पीजीआई मेेडिकल टेक्नोलाजिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल का कहना है कि कुछ कर्मचारियों की वजह से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यदि लैब टेक्नीशियन गलती को न पकड़े तो मरीज का टेस्ट भी नहीं हो सकेगा। इस बारे में जब उनकी गलती बताई जाती है तो वह अपनी गलती नहीं मानते हैं। पीजीआई प्रशासन को चाहिए इस दिशा में गंभीरता से सोचे और गलतियों को सुधारे।
इन पांच टेस्ट से समझे मुद्दा
दिनांक डाक्टर ने लिखे टेस्ट रेट (रुपये में) फीट कटी रेट (रुपये में)
22 मई मलेरिया पैरासाइट 10 एबीसीएमपी 25
26 मई एसिड फास्ट बेक्ली सीमर 25 एएफबी कल्चर 100
26 मई टोफोजाइट इन्वेस्टीगेशन 30 एंटीबाडी डिटेक्शन 100
26 मई फंगल कल्चर 150 फंगल सिरोलाजी 100