अपनी सौतेली बेटी के साथ दुराचार और फिर हत्या करने के आरोपी पिता को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
यह मामला गत वर्ष अगस्त में सेक्टर-5 थाने में दर्ज हुआ था। पिता ने ही बच्ची के गुम होने की शिकायत मौली जागरां में दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में सेक्टर-5 में बच्ची का शव मिला।
पहले पिता ही शिकायतकर्ता था, जो बाद में आरोपी बन गया और अब बरी हो गया, क्योंकि पुलिस कोर्ट में आरोप साबित नहीं कर सकी। आरोपी पर न तो दुष्कर्म के आरोप साबित हो सके और न ही हत्या का मकसद साबित हुआ।
कोर्ट में ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान में भी झोल आया। हालांकि, पुलिस के पास आरोपी के फोन के लोकेशन का भी रिकॉर्ड था, लेकिन कोर्ट में बयान दर्ज कराते वक्त गवाहों के बयान एक-दूसरे के विरोधाभासी हो गए।
वहीं, फारेंसिक टीम ने कोर्ट में कहा कि 22 अगस्त को सूरज थिएटर के पीछे से खून के धब्बों वाले कपड़े, घास व बच्ची की चप्पल बरामद की थी, लेकिन पुलिस ने कहा कि यह सबूत 21 अगस्त को जुटाए गए थे।
ऐसे ही कई तरह के झोल होने के चलते आरोपी पर आरोप साबित नहीं हो सके।
यह था पुलिस की चार्जशीट में
पुलिस केस के मुताबिक, आरोपी ने अपनी दूसरी पत्नी की तीन साल की बेटी को इसलिए मारा था, क्योंकि वह आरोपी के बच्चों को प्रताड़ित करती थी। 17 अगस्त 2013 को आरोपी बच्ची को अपने साथ लेकर मौलीजागरां स्थित घर से निकला।
ऑटो से जीरकपुर पहुंचा और काफी देर जीरकपुर में भटकने के बाद वापस पंचकूला आ गया। सेक्टर-1 में सूरज थिएटर के पीछे बच्ची के मुंह पर कपड़ा बांध दिया और दुराचार के बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
इसके बाद सेक्टर-5 में मंडी मैदान के नजदीक सड़क के किनारे शव छोड़ गया।
बच्ची को फेंकने के बाद मौली जागरां पुलिस चौकी गया और मनीमाजरा थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 17 अगस्त की रात को सेक्टर-5 थाना पुलिस को शव के बारे सूचना मिली।
आस-पास के थानों में सूचना दी गई तो मनीमाजरा पुलिस मौके पर पहुंची। साथ ही उसे भी लेकर आई, जिसने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिनाख्त होने के बाद पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज हुआ, लेकिन अगले ही दिन पुलिस ने खुलासा करते हुए शिकायतकर्ता को ही आरोपी बनाया था।