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चंडीगढ़ः इंडस्ट्रियल एरिया में एडिशनल एक्टीविटीज और नीड बेस्ड चेंज को मिली मंजूरी

Tue, 05 Feb 2019 01:58 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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चंडीगढ़ प्रशासन ने आखिरकार 35 साल बाद चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज को राहत देते हुए कई वायलेशन को खत्म कर दिया है। एडवाइजर मनोज परिदा ने काफी समय से लंबित मामले को चंद मिनटों में ही सुलझा दिया। अब इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2015 के तहत उन सभी मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी को मंजूरी मिल गई है, जिन्हें चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने हरी झंडी दे रखी है। 

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इसके तहत सभी तरह की आईटी एक्टिविटीज भी मंजूर कर ली गई हैं। कई अतिरिक्त एक्टिविटीज को भी मंजूरी मिली है। लीज होल्ड प्रापर्टी मामले में रेट को लेकर कानूनी राय मांगी गई है। जल्द ही इस मसले पर भी व्यवसायियों को राहत मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार लीज होल्ड मामले में एडवाइजर ने अपनी मुहर लगा दी है, लेकिन प्रशासक ने नए और पुराने रेट को लेकर विचार-विमर्श करने के बाद कानूनी राय लेने का निर्णय लिया है। 

सोमवार को एडवाइजर की पहल पर प्रशासक से अनुमति मिलने के बाद इंडस्ट्रियल को जरूरत के मुताबिक नीड बेस्ड चेंजिज को मंजूरी दे दी गई है। अब ऑफिस-कम-डिस्प्ले ब्लॉक को वर्कशाप के साथ इंटर चेंज किया जा सकता है। इंडस्ट्री इसकी काफी समय से जरूरत महसूस कर रही थी। बशर्ते इसमें बिल्डिंग बॉयलॉज और फायर नार्म्स का ख्याल रखा जाए। इंडस्ट्रियल प्लॉट का लीज होल्ड से फ्री-होल्ड कनवर्जन भी जल्द मंजूर होने की उम्मीद है।

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इन पर नहीं लगेगा अतिरिक्त चार्ज 

इंडस्ट्री के भीतर बने साइकिल स्टैंड को रॉ मैटीरियल की स्टोरेज व अन्य इंडस्ट्रियल से संबंधित कामों के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। इंडस्ट्रियल एरिया में चोरी की घटनाओं को देखते हुए बेहड़े को पॉली कारबोनेट शीट्स कवर करने के साथ स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। शर्त यह है कि इसमें कोई अतिरिक्त फ्लोर एरिया नहीं जोड़ा जाएगा। इसका यूटी प्रशासन कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लेगा। बस बिल्डिंग बॉयलॉज व फायर विभाग की ओर से जारी शर्तों के अनुरूप हो। 

इन एक्टिविटीज को प्रशासन ने दी मंजूरी
इंडस्ट्रीज में कुछ अतिरिक्त एक्टिविटीज को मंजूरी दे दी गई है। अभी तक ये अप्रूवल नहीं थी। सर्विसेज, इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल, स्ट्रक्चरल टेस्टिंग लैब्स, ऑडियो विजुअल रिकार्डिंग स्टूडियोज फार सोशल मीडिया, डाक्यूमेंटेशन सेंटर फार इंडस्ट्रियल डिजाइन एंड प्रिंटिंग, कैड, कैम, डिजाइन वर्कशाप, सिक्योरटी मैनेजमेंट सर्विसेज, सभी तरह के ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर एवं इंडस्ट्री एंड ऑटोमोबाइल रिलेटिड सर्विसेज, रिपेयर सेंटर विद स्पेयर्स एंड असेसरीज, आईटी, आईटीईएस टेलिकॉम, डीटीएच, इंटरनेट एंड केबल ऑपरेटर्स सर्विसेज जैसे टेलीकॉम, जनरल वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स जनरल आइटम्स, इंडस्ट्रियल गुड्स, व्हाइट गुड्स, मेडिकल एवं सर्जिकल गुड्स, रेस्टोरेंट्स में बेस किचन, आउटडोर कैटरर (बिना रेस्टोरेंट खोले), टेक अवे एवं ऑनलाइन रेस्टोरेंट्स अप्रूव कर दी गई हैं।

गुरुवार को हुई थी एडवाइजर की पहली मीटिंग
बीते गुरुवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के सलाहकार मनोज परिदा की अध्यक्षता में इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के पदाधिकारियों के साथ यूटी सचिवालय में एक मीटिंग हुई थी। इसमें एसोसिएशन की मांगों और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई थी। 

बैठक में एडवाइजर ने विभागीय अफसरों से पूछा था कि कमेटियां बनने के बाद भी लोगों को राहत क्यों नहीं मिल रही है। इस संबंधित अधिकारिक कार्रवाई चलने की बात कही। इसी दौरान एडवाइजर ने इंडस्ट्रियल एसोसिएशन को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगे वाजिब हैं, जल्द ही समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा।

ऐसे डेवलप किया गया इंडस्ट्रियल एरिया
शहर में इंडस्ट्रियल एरिया 1200 एकड़ में डेवलप है। यह फेज-1 और 2 हिस्से में है। यह फेज-1 में 776.14 एकड़ और फेज-2 में 486 एकड़ में फैला है। दोनों फेज में लगभग 2500 प्लॉट लीज होल्ड पर हैं। वॉयलेशन का मामला काफी पुराना है। मिसयूज और वॉयलेशन की पेनाल्टी भी आज तक तय नहीं हो पाई थी। एक्ट में संशोधन कर अब इसे मंजूरी दे दी गई है।
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