सीएलयू सीडी कांड केस में लोकायुक्त ने कांग्रेस के पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। हरियाणा में यह पहला ऐसा मामला है, जब पांच पूर्व विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत मामला दर्ज किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।
लोकायुक्त के इस रुख से हरियाणा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) विनोद भयाना, पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह तथा रामनिवास घोड़ेला के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस सकता है। मामले से संबंधित सीडी इनेलो की ओर से तैयार की गई थी।
प्रदेश की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में साल 2013 में इनेलो की ओर से तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र, पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, पूर्व सीपीएस विनोद भयाना, पूर्व विधायक जरनैल सिंह तथा रामनिवास घोड़ेला समेत कई आठ कांग्रेसी नेताओं का स्टिंग ऑपरेशन कर उनकी सीडी जारी की गई थी।
सीडी में नेताओं को सीएलयू के एवज में लाखों रुपये मांगते हुए दिखाया गया है, लेकिन सीडी जारी होने पर इस मामले में कार्रवाई के लिए इनेलो की तमाम कोशिशों के बावजूद पूर्व सरकार ने केस की जांच नहीं करवाई, नतीजतन मामले पर कार्रवाई भी नहीं की जा सकी।
बाद में यह मामला लोकायुक्त के पास चला गया। आखिरकार जांच के आधार परलोकायुक्त जस्टिस प्रीतम सिंह पाल ने बुधवार को पांचों पूर्व विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत मामला दर्ज करने की सिफारिश की।
आईपीएस वी.कॉमराज की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
लोकायुक्त की ओर से दिए गए फैसले का आधार पूर्व एडीजीपी वी.कामराज की ओर से की गई मामले की जांच बनी है। मामले में कांग्रेसियों के शोरगुल के बाद लोकायुक्त ने जांच वी.कामराजा को सौंप दी थी।
जांच के दौरान सभी आरोपियों, शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने सहित एफएसएल से वॉयस सैंपल की भी जांच कराई गई थी। रिपोर्ट में आला पुलिस अधिकारी स्वीकार किया था कि पूर्व विधायकों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं।
सीडी की जांच के बाद की गई एफआईआर की सिफारिश
शिकायतकर्ता के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने बताया कि पिछली सरकार के दौरान सीएलयू को लेकर स्टिंग ऑपरेशन की कुछ सीडी सामने आई थी। सभी सीडी लोकायुक्त की अदालत में पेश कर दी गई थी। लोकायुक्त ने मामले में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
लोकायुक्त ने मामले पर एक्शन टेकन रिपोर्ट तीन महीने में सौंपने को कहा है। मामले में जिस पार्टी के विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है, वह हाईकोर्ट में इसे चुनौती भी दे सकते हैं।
ऐसे हैं आरोपी विधायक
जिन पूर्व विधायकों के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है, उनमें राव नरेंद्र सिंह वर्ष 2009 में हजकां के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। चुनाव जीतने के बाद राव नरेन्द्र सिंह और विनोद भयाना ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
नरेश सेलवाल की गिनती हमेशा से ही सैलजा समर्थकों में होती रही है। वह कभी-कभी हुड्डा सरकार पर राजनीति हमला करते रहे हैं। जरनैल सिंह रतिया उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। जरनैल सिंह का हुड्डा सरकार में कोई काम नहीं रुका, जबकि पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला को हमेशा उनकी शांत छवि का फायदा मिला।