फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एजेंसी का दावाः वीजा मांगने वाले आधे भारतीय छात्र धोखेबाज होते हैं

Sun, 18 Sep 2016 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(सुरिंदर पाल)
विज्ञापन
Study in New Zealand - फोटो : File Photo
विज्ञापन
न्यूजीलैंड में पढ़ने के लिए वीजा का आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों में आधे धोखेबाज हैं। न्यूजीलैंड की इमिग्रेशन एजेंसी के मुताबिक आवेदन करने वाले 50 फीसदी भारतीय विद्यार्थी धोखा देकर स्टडी वीजा हासिल करना चाहते हैं। इसे देखते हुए न्यूजीलैंड ने वीजा नियमों के अनुपालन को लेकर जांच और सख्त कर दी है। इससे वहां जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है।
विज्ञापन


न्यूजीलैंड स्टडी वीजा के लिए आवेदनकर्ता के परिजनों के खाते में कम से कम 25 लाख की राशि बैंक में होनी चाहिए। अक्सर आवेदक छात्रएजेंटों से बैंक में बैलेंस का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करा लेते हैं जबकि बैंक खाते में पैसा होता ही नहीं है। दूतावास व एजेंसी कई बार जांच में इस झूठ को पकड़ लेते हैं, जिससे फर्जीवाड़ा सामने आ जाता है।

न्यूजीलैंड इमिग्रेशन एजेंसी की मानें तो फर्जीवाड़ा करने वाले भारतीय विद्यार्थियों में 85 फीसदी फाइनांस से संबंधित होते हैं जबकि बाकी 15 फीसदी अपने स्थान पर किसी अन्य को टेलीफोन इंटरव्यू के लिए खड़ा कर देते हैं। इसी के मद्देनजर जांच में सख्ती करके जुलाई 2016 में केवल 34 फीसदी भारतीय विद्यार्थियों को ही वीजा दिया गया और 66 फीसदी अयोग्य ठहरा दिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

...वरना बदनामी बढ़ती जाएगी

- फोटो : Demo Pic
इमिग्रेशन आंकड़ों के मुताबिक हर साल भारत से करीब 25 हजार विद्यार्थी स्टडी वीजा के लिए न्यूजीलैंड दूतावास में आवेदन करते हैं। भारी संख्या में आवेदन के पीछे एक ऐसी व्यवस्था मानी जा रही है जिसके मुताबिक एक समय बाद भारतीय छात्रों को वहां पर पक्की रिहायश मिल जाती है और वे न्यूजीलैंड के नागरिक बन जाते हैं। इस साल के पहले छह महीनों में आधे विद्यार्थियों के वीजा फर्जीवाडे़ के कारण रद किए जा चुके हैं।

एजेंटों और विद्यार्थियों को समझना होगा कि जाली दस्तावेजों का प्रयोग न करें। इससे भारत की बदनामी होती है साथ ही ईमानदार विद्यार्थियों के लिए भी दिक्कत आ रही है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इन देशों के दरवाजे भारतीय विद्यार्थियों के लिए बंद हो जाएंगे। - सुकांत त्रिवेदी (अधिकृत एजेंट, ऑस्ट्रेलियन व न्यूजीलैंड स्टडी वीजा)

नेपाल, श्रीलंका से पिछड़ा भारत
सख्ती की वजह से न्यूजीलैंड जाकर पढ़ाई करने के मामले में भारतीय विद्यार्थी श्रीलंका व नेपाल से पिछड़ गए हैं। बीते छह माह का श्रीलंका का वीजा रेट 63.6 फीसदी था जबकि नेपाल का 44.7 फीसदी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें