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डेरामुखी पर FIR रद्द करने को हाईकोर्ट में चुनौती

Wed, 28 Jan 2015 05:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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श्री गुरू गोबिंद सिंह जी जैसी वेषभूषा बनाकर विवादों में घिरे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ बठिंडा में दर्ज एफआईआर को रद्द किए जाने के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मंगलवार को मामला जस्टिस दया चौधरी की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए पहुंचा, लेकिन इसे अन्य बेंच के लिए रेफर कर दिया गया।
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अब मामले पर सुनवाई पांच फरवरी को होगी। बठिंडा के सलाबतपुरा गुरुद्वारा प्रधान राजिंदर सिंह की शिकायत पर डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ कोतवाली थाना बटिंडा में 20 मई 2007 को धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज हुआ था।

शिकायत थी कि राम रहीम ने 11 मई को गांव में एक सत्संग के दौरान श्री गुरू गोबिंद सिंह जैसी पोषाक पहनकर ठीक उसी तरीके से जाम-ए-इंसा पिलाया, जैसे श्री गुरू गोबिंद सिंह ने पांच प्यारों को अमृत धारण करवाया था।
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इससे सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। पंजाब पुलिस ने बठिंडा अदालत में रिपोर्ट दी कि राम रहीम के खिलाफ कार्रवाई नहीं बनती, लिहाजा मामला रद्द किया जाए।

पुलिस की ओर से दलील दी गई कि शिकायतकर्ता राजिंदर सिंह ने जो हलफनामा दिया कि वह सत्संग के दिन सलाबतपुरा में नहीं था। बठिंडा अदालत ने पिछले साल सात अगस्त को एफआईआर रद्द किए जाने को स्वीकृति प्रदान कर दी थी।

बठिंडा पुलिस ने कोर्ट से रद्द कराई थी एफआईआर

इस मामले को अब जसपाल सिंह मंझपुर ने एडवोकेट नवकिरन सिंह के माध्यम से चुनौती दी है। याचिका में बताया गया है कि एक अन्य मामले में बठिंडा अदालत में राजिंदर सिंह ने कहा है कि उसने पुलिस को ऐसा कोई हलफनामा नहीं दिया कि वह सलाबतपुर में मौजूद नहीं था।

याचिका में बठिंडा अदालत का फैसला रद्द कर पुलिस की कैंसलेशन रिपोर्ट मंजूर नहीं करने की मांग करते हुए आरोप लगाया गया है कि श्रद्धालुओं की संख्या के कारण राम रहीम का राजनीति में प्रभाव है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि बठिंडा से पंजाब के मुख्यमंत्री की पुत्रवधु को लोकसभा चुनाव में राम रहीम ने मदद की। इसी के एवज में पंजाब सरकार ने बठिंडा अदालत में कैंसलेशन रिपोर्ट दाखिल कर कर्ज चुकाया है।
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नपुंसकता केस रद्द कराने को डाक्टर पहुंचा हाईकोर्ट

डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को कथित तौर पर नपुंसक बनाने के मामले में जिस डाक्टर एमपी सिंह पर आपरेशन करने का आरोप है, उन्होंने भी इस मामले की सीबीआई जांच का फैसला रद्द किए जाने की मांग करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अरजी दाखिल की है।

एमपी सिंह की ओर से दायर अर्जी पर सीबीआई और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए इसकी सुनवाई मुख्य मामले के साथ 23 फरवरी को तय कर दी गई। एमपी सिंह ने एडवोकेट कार्तिके के माध्यम से दायर अर्जी में आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ता हंसराज चौहान के मामले में उन्हें प्रतिवादी नहीं बनाया गया।

इस तरह, उन्हें सुनने का मौका दिए बगैर एकल बेंच द्वारा मामले की सीबीआई जांच का आदेश देना गलत है। एमपी सिंह ने याचिका में कहा है कि महज चौहान के बयान के आधार पर उन पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने नपुंसक बनाने के आपरेशन किए हैं। एमपी सिंह ने अर्जी में खुद को बेकसूर बताते हुए एकल बेंच का फैसला रद्द करने और हाईकोर्ट में उनकी अर्जी की सुनवाई तक सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि एकल बेंच के फैसले को पहले से चुनौती दी जा चुकी थी और इसकी सुनवाई 23 फरवरी को होनी है। इसी कारण अब एमपी सिंह की अर्जी पर सुनवाई भी उसी दिन रख दी गई है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगाने से पहले ही इनकार कर दिया था।
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