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चंडीगढ़ में ऐप बेस्ड कैब दौड़ाना चाहते हैं, ये शर्तें पूरी करने पर रजिस्ट्रेशन

Fri, 22 Jul 2016 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मैक्‍स कैब - फोटो : अमर उजाला
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अगर आप चंडीगढ़ में ऐप बेस्ड कैब दौड़ाना चाहते हैं तो आपको पॉलिसी के तहत कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी, तभी रजिस्ट्रेशन होगा। ऐप बेस्ड कैब चलाने की इच्छुक कंपनियों को प्रशासन 5 साल के लिए लाइसेंस देगा। उससे पहले कंपनियों को एक्ट के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नई ऐप बेस्ड कैब पॉलिसी को यूटी प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने अपनी मंजूरी दे दी है।
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मंजूरी के बाद प्रशासन ने इस पर लोगों से आपत्तियां पूछी हैं। कोई भी व्यक्ति पॉलिसी पर अपने आब्जेक्शंस स्टेट ट्रांसपोर्ट अथोरिटी (एसटीए) के पास 15 दिन तक दर्ज करवा सकता है। आपत्तियां दूर होने के बाद पॉलिसी की नोटिफिकेशन जारी कर इसे लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद शहर में कोई भी ऑन-डिमांड ट्रांसपोर्टेशन सर्विस बिना पॉलिसी के नहीं दी जा सकती। ओला, टैक्सी फॉर श्योर और उबर एप कैब कंपनी शहर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। रेडियो और वेब कैब की तरह शहरवासियों की सुरक्षा को देखते हुए नई पॉलिसी बनाई गई है।

पॉलिसी में यह सब
ऐप बेस्ड कैब आपरेटर यानी संचालक को अपनी कंपनी को कंपनी एक्ट-2013 के तहत रजिस्ट्रड करवाना अनिवार्य होगा। कंपनी रजिस्ट्रड करवाने के लिए आपरेटर के पास कम से कम 100 टैक्सी होनी चाहिए। कंपनी का शहर में अपना चौबिसो घंटे सातों दिन खुलने वाला कॉल सेंटर होना चाहिए। इन सब शर्तो को पूरा करने पर ही आपरेटर को शहर में ऐप बेस्ड कैब चलाने के लाइसेंस दिया जाएगा। एप कैब संचालक को 5 साल के लिए परमिट दिया जाएगा। एप कैब संचालक को एसटीए के पास सभी टैक्सियों व ड्राइवर का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है।
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पंजाब-हरियाणा की कैब को देना होगा टैक्स
पॉलिसी के अनुसार पंजाब और हरियाणा नंबर की ऐप बेस्ड कैब को चंडीगढ़ में प्रवेश पर सेवा शुल्क देना होगा। सेवा शुल्क अदा नहीं करने वाले पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।

महिला सुरक्षा के लिए होगा पैनिक बटन
महिलाओं की सुरक्षा के लिए कैब में पैनिक बटन होना अनिवार्य है। यह बटन पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिड होगा। सुरक्षा के लिहाज से सभी कैब में जीपीएस, जीपीआरएस, सीसीटीवी लगा होना जरूरी है। इन सभी का लिंक 24 घंटे आपरेटेड कॉल सेंटर से होना चाहिए। कॉल सेंटर की मदद से यूटी पुलिस कैब पर 24 घंटे नजर रख सकेगी। कैब के अंदर बोर्ड लगा होना चाहिए। जिस पर ड्राइवर का नाम, पता, फोन नंबर और कैब का नंबर और ऑपरेटर का नाम पता होना चाहिए।

एसटीए तय करेगा एप कैब का किराया
एसटीए कैब के लिए किराया निर्धारित करेगा। निर्धारित किराए से कोई भी कंपनी अधिक नहीं वसूल सकती। ऐसी कोई भी शिकायत मिलने पर लाइसेंस रद करने का अधिकार एसटीए के पास होगा। हालांकि एप कैब पहले से ही किराया 5 रुपये प्रति किलोमीटर तक ले रही हैं। जबकि एसटीए ने अधिकतम किराया 23 रुपये प्रति किलोमीटर तय कर रखा है।

पॉलिसी के अहम बिंदू
- ऐप बेस्ड कैब ड्राइवर के पास लाइसेंस, एसटीए  द्वारा दिया गया आईडी नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
- दुर्घटना के समय अपनी लोकेशन देने के लिए एप कैब में पैनिक बटन होना चाहिए। जिससे लोकल पुलिस को कैब की लोकेशन दी जा सके।
- एप कैब चलाने वाला ड्राइवर चंडीगढ़ में पिछले दो साल से रह रहा हो। अगर ड्राइवर पंजाब, हरियाणा व हिमाचल का रहने वाला है तो उसे वहां का निवास प्रमाण पत्र एसटीए के पास जमा करवाना अनिवार्य होगा।
- एप कैब में डिजिटल मीटर लगा होना चाहिए और कैब संचालक को रोज का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

एप कैब पॉलिसी को प्रशासक से मंजूरी मिल गई है। इस पर लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियां दूर करने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। पॉलिसी लागू होने के बाद इससे बाहर कोई भी कैब नहीं चल सकेगी। पॉलिसी में हर छोटे-छोटे से प्वाइंट का ध्यान रखा गया है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा और कैब में सुविधा को वरियता दी गई है।
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- राजीव तिवारी, एडीशनल सेक्रेटरी, एसटीए
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